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प्राइवेट कंपनी से होल्डिंग टैक्स की वसूली बन रही गले की फांस

Updated at : 16 Jan 2019 5:49 AM (IST)
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प्राइवेट कंपनी से होल्डिंग टैक्स की वसूली बन रही गले की फांस

गया : पिछले ढाई महीने में निगम के आंतरिक स्रोत में भारी गिरावट आयी है. इसके कारण अब तक हो रहे आवश्यक विकास कार्यों पर ब्रेक लगने की आशंका बढ़ गयी है. इसमें मुख्य कारण होल्डिंग टैक्स वसूली की गति काफी धीमी होनी बतायी जाती है. निगम सूत्रों के अनुसार, पहले हर माह 60 लाख […]

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गया : पिछले ढाई महीने में निगम के आंतरिक स्रोत में भारी गिरावट आयी है. इसके कारण अब तक हो रहे आवश्यक विकास कार्यों पर ब्रेक लगने की आशंका बढ़ गयी है. इसमें मुख्य कारण होल्डिंग टैक्स वसूली की गति काफी धीमी होनी बतायी जाती है. निगम सूत्रों के अनुसार, पहले हर माह 60 लाख रुपये होल्डिंग टैक्स वसूली होती थी.
यानी ढाई माह का हिसाब निकाले, तो डेढ़ करोड़ रुपये पहुंच जाते थे. प्राइवेट कंपनी ने पिछले ढाई महीने में महज 43 लाख ही टैक्स वसूली किया है. निगम के आंतरिक स्रोत बढ़ाने के लिए के लिए एक प्राइवेट कंपनी से एग्रीमेंट किया गया है.
लेकिन, निगम की आमदनी बढ़ने के बजाय अब तक घटती ही दिख रही है. निगम सूत्रों की माने, तो प्राइवेट कंपनी टैक्स वसूली करने से पहले होल्डिंग के असेसमेंट करने में जुट गयी है. इसके साथ ही कम कर्मचारियों के लगाने भी टैक्स वसूली की गति धीमी है.
इन पर खर्च होता है
आंतरिक स्रोत के पैसों को खर्च करने का अधिकार निगम बोर्ड को होता है. टैक्स के आये पैसों से वेतन, विकास योजनाएं व संसाधन की खरीदारी की जाती है. इसमें यह अंकुश नहीं होता है कि एक निश्चित स्थान पर ही इन पैसों को खर्च करना है. कहा जाये कि इन पैसों को अब तक आवश्यक काम में खर्च करना सुनिश्चित किया जाता रहा है.
आमलोग भी है परेशान
टैक्स जमा करने को लेकर आमलोग भी काफी परेशान हैं. करीमगंज के अनवर मियां ने कहा कि कुछ दिन पहले घर पर एक फॉर्म दिया गया था. उसे भर कर करीब आठ दिनों से निगम कार्यालय स्थित टैक्स काउंटर का चक्कर लगा रहे हैं. यहां कोई सही जानकारी तक देने को तैयार नहीं है.
इधर माड़नपुर के रामप्रसाद साव कहते हैं कि उनका टैक्स पिछले वर्ष तक जमा है. उसके बाद भी टैक्स जमा करने के लिए कई तरह के कागजात मांग किये जा रहे हैं. टिकारी रोड के रामचंद्र साव कहते हैं कि पहले कर्मचारी पहुंचते थे और पुरानी रसीद के सहारे ही हर वर्ष टैक्स का रसीद काटा जाता था.
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