बोधगया : बुरी आत्माओं से शांति के लिए लामाओं ने किया मुखौटा डांस

Updated at : 30 Dec 2018 10:24 AM (IST)
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बोधगया : बुरी आत्माओं से शांति के लिए लामाओं ने किया मुखौटा डांस

भूटान की परंपरा है मुखौटा डांस मृत आत्माओं को स्वर्गलोग पहुंचने में होनेवाली बाधा दूर होने की है मान्यता बोधगया : अपने आस-पास व घरों में प्रवास करनेवाली बुरी आत्माओं से शांति व बुरी आत्माओं को दूर भगाने के निमित्त शनिवार को बोधगया के जानपुर गांव स्थित ड्रुक नवांग थुवतेन चोलिंग (भूटान मंदिर) परिसर में […]

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भूटान की परंपरा है मुखौटा डांस
मृत आत्माओं को स्वर्गलोग पहुंचने में होनेवाली बाधा दूर होने की है मान्यता
बोधगया : अपने आस-पास व घरों में प्रवास करनेवाली बुरी आत्माओं से शांति व बुरी आत्माओं को दूर भगाने के निमित्त शनिवार को बोधगया के जानपुर गांव स्थित ड्रुक नवांग थुवतेन चोलिंग (भूटान मंदिर) परिसर में मुखौटा डांस शुरू किया गया. इसमें करीब 50 लामाओं द्वारा मुखौटा व ब्लैक हैट नृत्य की प्रस्तुति दी गयी. तीन दिवसीय इस आयोजन में मुख्य अतिथि भूटान के पूर्व डिप्टी संघराजा दोरजे लोपेन नवांग तेनजीन हैं.
मंदिर के सचिव सोनम दोरजे ने बताया कि मनुष्य की मौत के बाद जब उनकी आत्मा स्वर्ग के लिए प्रस्थान करती है, तब रास्ते में विभिन्न आकृति व शक्लों वाले जीव-जंतु उनके मार्गों में बाधा खड़े करते हैं. हालांकि, यह सब भी भगवान के ही रूप होते हैं, लेकिन केवल आत्मा का मार्ग भटकाने के लिए डरावने शक्ल अख्तियार कर रास्ते में मिलते हैं. इससे आत्मा अपना मार्ग भटक जाता है और स्वर्ग तक नहीं पहुंच पाता है. इस कारण जीवन काल में ही लोग अगर ऐसी शक्लों वाले लोगों को देख ले तो मृत्यु के बाद उनकी आत्मा को ऐसी डारावनी शक्लों से भय नहीं होगा व सुगमता से स्वर्ग के मार्ग पर अग्रसर होगा.
प्रेतात्माओं से मिलती है मुक्ति
ड्रुक नावांग थुवतेन चोलिंग मंदिर के सचिव ने बताया कि ब्लैक कैट डांस का मकसद बुरी आत्माओं से शांति व प्रेतात्माओं से मुक्ति पाना है. उन्होंने बताया कि अगर किसी के घर में बुरी आत्माओं का प्रवेश होता है, तो उसके घर में अशांति फैल जाती है. परिवार में झगड़ा होने लगता है. इसके लिए पूजा-जागरण कराते हैं. इसी तरह भूटानी परंपरा के अनुसार, प्रेतात्माओं व बुरी आत्माओं से शांति व मुक्ति के लिए ब्लैक कैट डांस आयोजित किया जाता है.
यह हर वर्ष यहां तीन दिनों तक आयोजित किया जाता है. इससे मंदिर परिसर के साथ ही आस-पास के क्षेत्रों में भी बुरी आत्माओं का आना-जाना नहीं होता है. इस मुखौटा डांस को देखने के लिए भूटान सहित अन्य देशों के लोग भी मंदिर परिसर में मौजूद थे.
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