जीतनराम मांझी ने दशरथ मांझी के लिए मांगा भारतरत्न
Updated at : 24 Aug 2018 7:07 AM (IST)
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बोधगया : पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को बोधगया में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने कहा कि पर्वत पुरुष बाबा दशरथ मांझी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए. इससे भारत रत्न सम्मान का भी मान बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि पता चला है कि दशरथ […]
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बोधगया : पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को बोधगया में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने कहा कि पर्वत पुरुष बाबा दशरथ मांझी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए. इससे भारत रत्न सम्मान का भी मान बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि पता चला है कि दशरथ बाबा व कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किये जाने की अनुशंसा बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने की है, लेकिन अब तो राज्य व केंद्र दोनों में एनडीए की सरकार है.
अब किस बात की देर है. पूर्व सीएम श्री मांझी ने कहा कि बोधगया में विभिन्न बौद्ध देशों का बौद्ध मठ स्थित है. उनके निर्माण के लिए सरकार जमीन मुहैया करा रही है. इस कारण अब बाबा दशरथ की प्रतिमा स्थापित करने व एक धर्मशाला के निर्माण को जमीन उपलब्ध कराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि 24 अगस्त को गेहलौर स्थित दशरथ मांझी की समाधि स्थल के पास कार्यक्रम का आयोजन किया जाना है. इसमें सरकार के मंत्री भी शामिल होंगे.
इस कारण सरकार से हमारी मांग है कि बाबा दशरथ के घर के आसपास के टोलों में रह रहे करीब 1200 भुईयां परिवारों को पक्का मकान बना कर दें. तभी यह साबित हो पायेगा कि सरकार को बाबा दशरथ मांझी के प्रति श्रद्धा है. गरीबों को पक्का घर मुहैया कराना ही बाबा दशरथ के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. श्री मांझी ने कहा कि वह जब सीएम थे तब 22 लाख मकान बनाने का लक्ष्य तय किया था. लेकिन, उन्हें हटा दिया गया. चार महीने और रह जाता तो सभी को पक्का मकान बन जाता. भुईयां समाज का उत्थान की बात करते हुए श्री मांझी ने कहा कि उन्होंने दशरथ मांझी श्रम शोध संस्थान की स्थापना की थी.
इसके लिए जमीन भी आवंटित कर दी थी. लेकिन, अब तक यह शुरू नहीं हो सका. शोध संस्थान के माध्यम से युवाओं को विभिन्न टेक्निकल ट्रेडों में ट्रेनिंग दी जाती व वे सभी विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर सकते थे. लेकिन, सरकार अब नाम बदल कर कौशल विकास संस्थान करने के फिराक में लगी है. युवा शक्ति सेवा संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में श्री मांझी ने इस बीच भुईयां समाज के लोगों को एकजुट होकर आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक लाभ उठाने की भी अपील की. इस बीच उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ को काट कर रास्ता बनाने वाले दशरथ बाबा ने कभी भी शराब नहीं पी. वे कबीरपंथी थे.
इस कारण उनके चाहने वाले भी शराब से दूर रहें. हालांकि, शराबबंदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले गांव-गांव में शराब की दुकानें खुलवायी व अब उसे बंद कर लोगों को जेल में डालने का काम हो रहा है. करीब एक लाख 20 हजार लोगों को शराब के मामले में जेल भेजा जा चुका है व इसमें 92 हजार के आसपास भुईयां समाज के लोग हैं. राजापुर मोड़ के पास नदी किनारे की जमीन पर आयोजित कार्यक्रम में नेपाल से आये भुईयां समाज के युवक-युवतियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम में एमएलसी डॉ संतोष कुमार सुमन, पूर्व सांसद राजेश कुमार मांझी सहित अन्य मौजूद थे.
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