प्रभात खबर पटना के 30 साल पूरे होने पर पढ़िए बोधगया की उस गुफा की कहानी, जहां बुद्ध ने 6 साल की थी कठोर तपस्या

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ढुंगेश्वरी पहाड़ी की तस्वीर (फोटो कलेंद्र प्रताप)

Bodhgaya Dungeshwari Cave: प्रभात खबर पटना संस्करण के 30 वर्ष पूरे होने पर पढ़िए बोधगया की ढुंगेश्वरी गुफा की कहानी, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति से पहले छह वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. अब रोपवे परियोजना से यह ऐतिहासिक स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए और सुगम होने जा रहा है.

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Bodhgaya Dungeshwari Cave: (कलेंद्र प्रताप, बोधगया) प्रभात खबर पटना संस्करण के 30 वर्ष पूरे होने के मौके पर पढ़िए बोधगया की उस ऐतिहासिक ढुंगेश्वरी पहाड़ी की कहानी, जहां भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति से पहले छह वर्षों तक कठोर तपस्या की थी.

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मान्यता है कि सिद्धार्थ गौतम ने इसी स्थान पर आत्म-साधना की. लंबे समय तक तपस्या के कारण उनका शरीर बेहद कमजोर हो गया था. इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि केवल शरीर को कष्ट देकर अंतिम सत्य की प्राप्ति संभव नहीं है.

छह साल की कठोर तपस्या का गवाह है ढुंगेश्वरी गुफा

ढुंगेश्वरी पहाड़ी की मुख्य गुफा में आज भी भगवान बुद्ध की कंकाल रूपी प्रतिमा स्थापित है. ध्यान की मुद्रा में बैठी यह प्रतिमा उनकी छह वर्षों की कठिन साधना और शारीरिक क्षीणता को दर्शाती है. यह प्रतिमा दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं को बुद्ध के संघर्ष और आत्मज्ञान की यात्रा की याद दिलाती है.

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ह्वेनसांग ने बताया था ‘प्रागबोधि’

ढुंगेश्वरी पहाड़ी का ऐतिहासिक महत्व भी काफी पुराना है. प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में इस स्थान का उल्लेख किया था. उन्होंने इसे ‘प्रागबोधि’ यानी ज्ञान प्राप्ति से पहले का स्थान बताया था. इससे इस स्थल की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और मजबूत होती है.

इसी गुफा से शुरू हुई बुद्ध बनने की यात्रा

कहा जाता है कि ढुंगेश्वरी गुफा में तपस्या के दौरान ही सिद्धार्थ गौतम को जीवन के अंतिम सत्य की खोज का मार्ग मिला.

इसके बाद वे बकरौर पहुंचे, जहां सुजाता नाम की कन्या ने उन्हें खीर खिलाई. फिर निरंजना नदी पार कर पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर उन्होंने अंतिम साधना शुरू की और आगे चलकर उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई.

हिंदू और बौद्ध आस्था का अनोखा संगम

ढुंगेश्वरी गुफा परिसर में हिंदू धर्म की माता ढुंगेश्वरी यानी मां तारा देवी की मूर्तियां भी स्थापित हैं. एक ही स्थान पर भगवान बुद्ध की कंकाल प्रतिमा और हिंदू देवी की मौजूदगी इस स्थल को दोनों धर्मों के श्रद्धालुओं के लिए खास बनाती है. हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

बौद्ध अनुयायियों के लिए बेहद पवित्र स्थल

ढुंगेश्वरी गुफा दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. महायान और तिब्बती परंपरा को मानने वाले श्रद्धालु इसे ‘महाकाल गुफा’ के नाम से भी जानते हैं. यहां पहुंचकर श्रद्धालु बुद्ध के कठिन तप और आत्मज्ञान की यात्रा को करीब से महसूस करते हैं.

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रोपवे से आसान होगी गुफा तक पहुंच

ढुंगेश्वरी पहाड़ी अब आधुनिक सुविधाओं से जुड़ने जा रही है. यहां बन रही रोपवे परियोजना का करीब 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है.

लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस रोपवे के शुरू होने के बाद श्रद्धालु और पर्यटक कुछ ही मिनटों में पहाड़ी पर स्थित ढुंगेश्वरी मंदिर और बौद्ध गुफाओं तक पहुंच सकेंगे.

इससे बोधगया आने वाले पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी और यह ऐतिहासिक स्थल पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत होगा.

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