चार फीसदी ही धान की रोपनी कर पाये हैं जिले के िकसान

Updated at : 26 Jul 2018 7:13 AM (IST)
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चार फीसदी ही धान की रोपनी कर पाये हैं जिले के िकसान

गया : धनराेपनी का समय धीरे-धीरे हाथ से निकलता जा रहा है. किसान व कृषि विभाग माैसम की बेरुखी से परेशान हैं पर, इस पर किसी का काेई जाेर नहीं चलता. हालांकि मंगलवार दोपहर बाद मौसम ने करवट ली है, जिससे कुछ उम्मीद जगी है. मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे से […]

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गया : धनराेपनी का समय धीरे-धीरे हाथ से निकलता जा रहा है. किसान व कृषि विभाग माैसम की बेरुखी से परेशान हैं पर, इस पर किसी का काेई जाेर नहीं चलता. हालांकि मंगलवार दोपहर बाद मौसम ने करवट ली है, जिससे कुछ उम्मीद जगी है. मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे से बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक 38़़.2 मिलीमीटर बारिश हुई है.
यूं बुधवार दिनभर छिट-पुट बारिश होती रही. इससे उत्साहित किसान धनरोपनी में जोरशोर से जुटे हैं. वहीं, इस बार वर्षा की कमी के कारण 1. 53 लाख हेक्टेयर भूमि में से बुधवार तक 6000 हेक्टेयर भूमि में ही धान की रोपनी हो सकी है. यानी 3.92 प्रतिशत जमीन पर ही ट्रांसप्लांटेशन किया जा सका है. जिला कृषि पदाधिकारी अशाेक कुमार सिन्हा ने बताया कि अब तक 18 प्रतिशत से अधिक जमीन पर धान की राेपनी हाे जानी चाहिए थी. जुलाई महीने में 294.5 मिली मीटर बारिश हाेनी चाहिए.
इसके विपरीत 25 जुलाई तक 104.9 मिलीमीटर ही बारिश हुई. जून व जुलाई में 25 जुलाई तक कुल 381.7 मिलीमीटर बारिश हाेनी चाहिए थी जिसकी तुलना में 195.1 मिलीमीटर ही बारिश हाे सकी है. यदि मौसम का हाल यही रहा ताे धान की उपज काफी कम होने से किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है. किसानों के लिए शासन व प्रशासन स्तर पर सिंचाई की अब तक कोई ठोस व वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है. इस कारण किसानों के चेहरे पर उदासी छायी हुई है.
न हाे बारिश, ताे करें वैकल्पिक खेती, हाे जायेगी क्षति पूर्ति
गया में अगस्त महीने में ही हमेशा से धान की राेपनी हाेती आयी है. अभी समय है. यदि किसान अपना बिचड़ा बचा कर रखें ताे बारिश हाेने के साथ ही इसकी राेपनी कर लक्ष्य काे हासिल कर सकते हैं. अगर बारिश 31 जुलाई के बाद भी बेहतर नहीं हाेती है, ताे फिर वैकल्पिक खेती किसान कर सकते हैं. 15 अक्तूबर से रबी की बुआई शुरू हो जाती है. इस दाैरान ढाई महीने में हाेनेवाली फसल काे लगा कर किसान खरीफ फसल की क्षति पूर्ति कर सकते हैं. लक्ष्य के बाद बची हुई भूमि पर वैकल्पिक खेती की जा सकती है. किसानाें के डीजल अनुदान के लिए अॉन लाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू है. जिले में तीन लाख 52 हजार किसान हैं, इसके विपरीत आठ हजार किसानाें का रजिस्ट्रेशन हाे चुका है. किसान डीजल अनुदान के लिए नजदीकी कॉमन सेंटर, वसुधा केंद्र में नि:शुल्क अॉनलाइन रजिस्ट्रेशन कराएं.
अशोक कुमार सिन्हा,जिला कृषि पदाधिकारी,गया
काम नहीं मिलने से खेतिहर मजदूर भी हताश
मॉनसून आने के बाद भी बारिश नहीं होने से किसान परेशान हैं. किसी भी स्थिति में धान के बिचड़े को बचाने का प्रयास जारी है. किसान इस सोच में हैं कि खेती चौपट हो गयी तो घर कैसे चलेगा. यह मुश्किल केवल किसानों के साथ ही नहीं है, वह मजदूर भी परेशान है जो खेतों में काम कर अपना घर चलाते हैं. खिजरसराय प्रखंड के रौनिया गांव में धान रोपनी करने आये मोतिहारी जिले के दो मजदूर रमेश चौहान व बिगन चौहान ने बताया कि धान रोपनी के लिए प्रति बिगहा उन्हें 1200 रुपये मिलते हैं. बारिश नहीं होने की वजह से इस बार किसान डीजल पंप सेट चला कर खेत के छोटे- छोटे हिस्सों में रोपनी करा रहे हैं. मुश्किल से एक दिन में दो-तीन बिगहा खेत में ही रोपनी हो पा रही है. मजदूर कहते हैं कि अगर अगले चार-पांच दिनों में बारिश नहीं हुई तो यहां काम की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी, ऐसे में घर (मोतिहारी) लौट जाना होगा. सावन में बारिश हुई तो वापस आयेंगे.
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