बिना थाना कोडिंग के सड़कों पर दौड़ रहे ऑटो
Updated at : 21 Jul 2018 9:57 AM (IST)
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गया जी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री अपने पूर्वजों की मोक्ष प्राप्ति के लिए श्राद्ध कर्म, पिंडदान व तर्पण करते हैं. इन तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य रूप से जिला प्रशासन पर ही होती है. विशेषकर मेला अवधि के दौरान छिटपुट अपराधिक घटनाएं होती रहीं है. पूर्व में घटित अपराधिक […]
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गया जी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री अपने पूर्वजों की मोक्ष प्राप्ति के लिए श्राद्ध कर्म, पिंडदान व तर्पण करते हैं. इन तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य रूप से जिला प्रशासन पर ही होती है. विशेषकर मेला अवधि के दौरान छिटपुट अपराधिक घटनाएं होती रहीं है. पूर्व में घटित अपराधिक घटनाओं में पुलिस द्वारा किये गये अनुसंधान के दौरान ऑटो चालकों की भी संलिप्तता उजागर हुई. इन सभी स्थितियों का मूल्यांकन करने के बाद वर्ष 2016 के पितृपक्ष मेला से पूर्व तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक गरिमा मलिक ने सड़कों पर दौड़नेवाली ऑटो पर थानावाइज कोडिंग किये जाने की शुरुआत की थी.
पुलिस प्रशासन को इस काम में अच्छी सफलता मिली. तीन हजार से अधिक ऑटो पर थाना कोडिंग का काम एक सप्ताह के भीतर पूरा करा लिया गया था लेकिन समय बीतने के साथ ही यह काम ठंडे बस्ते में चला गया. इस पर पुनः ध्यान देना एसएसपी ने उचित नहीं समझा. फिर कुछ माह के बाद स्थिति पूर्व की भांति सामान्य हो गयी. इस बीच दो हजार से अधिक नये व पुरानी ऑटो सड़कों पर दौड़ रहे हैं जिस पर थाना का कोडिंग नहीं है जबकि पितृपक्ष मेला 2018 सितंबर महीने से शुरू हो जायेगा. ऐसे में यदि अपराधिक घटनाएं होती है व उसमें ऑटो चालकों की संलिप्तता सामने आती है तो इसे प्रशासन की बड़ी चूक मानी जायेगी.
क्या है ऑटो पर थाना कोडिंग का मामला जिला पुलिस ने अपराधिक घटनाओं में संलिप्त ऑटो व चालकों को चिह्नित करने के लिए ऑटो पर थाना कोडिंग की व्यवस्था की थी. इसके तहत अपने फोटो पहचान पत्र व सभी कागजातों के साथ ऑटो चालक व ऑटो के मालिक अपने नजदीकी पुलिस थाना में पहुंच कर उसकी छाया प्रति जमा कर ऑटो पर थाना द्वारा कोडिंग करवायेंगे, ताकि अनुसंधान के दौरान पुलिस को पहचान करने में सहूलियत हो सके. इस प्रक्रिया के तहत ऑटो पर पुलिस थाना द्वारा एक नंबर लिखवाया जाता है. इससे पुलिस को ऑटो की पहचान करने में सहूलियत हो जाती है.
ऑटो पर थाना कोडिंग एक अच्छी पहल है. इसे नियमित रखना जरूरी है. बीच में यह काम किस कारण से रुका इसकी जानकारी नहीं है. ऑटो स्टैंड स्तर पर सर्वे करा कर शीघ्र ही शहर के सभी थानाध्यक्षों के साथ एक बैठक कर ऑटो पर थाना कोडिंग कराया जायेगा. इसके अलावा भी अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा हर संभव कदम उठाया जायेगा.
अनिल कुमार, नगर पुलिस अधीक्षक, गया
बिना थाना कोडिंग के ऑटो चालकों के विरुद्ध शिक्षित बेरोजगार ऑटो चालक संघ द्वारा भी कानूनी कार्रवाई की जायेगी. यदि बिना थाना कोडिंग का ऑटो पुलिस द्वारा पकड़ा जाता है तो इस पर संघ हस्तक्षेप नहीं करेगा. सभी ऑटो चालकों को ऑटो पर थाना कोडिंग कराने का निर्देश संघ द्वारा दिया जा चुका है. अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा उठाये गये इस कदम में संघ पूरी तरह से साथ है.
रमण प्रसाद, कार्यालय सचिव, शिक्षित बेरोजगार ऑटो चालक संघ, गया
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