जांच में खुलासा, नियमों को ठेंगा दिखा दी गयी प्रोन्नति

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jul 2018 6:01 AM

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गया : नगर निगम में कहीं भी कुछ करने में यहां के कर्मचारियों व अधिकारियों ने अपने आपको उदार दिखाया है. लेकिन, इस बार कई पार्षद पुराने कुछ फैसले पर सवाल उठाना शुरू कर दिये हैं. पिछले वर्ष उस वक्त के नगर आयुक्त द्वारा 19 कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला इन दिनों निगम में चर्चा […]

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गया : नगर निगम में कहीं भी कुछ करने में यहां के कर्मचारियों व अधिकारियों ने अपने आपको उदार दिखाया है. लेकिन, इस बार कई पार्षद पुराने कुछ फैसले पर सवाल उठाना शुरू कर दिये हैं. पिछले वर्ष उस वक्त के नगर आयुक्त द्वारा 19 कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला इन दिनों निगम में चर्चा का विषय बना हुआ है. कुछ दिन पहले बोर्ड की बैठक में इस मामले को उठाते हुए वार्ड पार्षद ओमप्रकाश सिंह ने कहा था कि पदोन्नति में संवर्ग परिवर्तन के साथ-साथ सरकार के नियमों का पालन नहीं किया गया है.
इसके बाद यह मामला तूल पकड़ लिया था. कर्मचारी इसके विरोध में अंदर-ही-अंदर गुटबाजी करने लगे थे. उसी बोर्ड की बैठक में कमेटी बना कर पदोन्नति की जांच करने की बात कही गयी. कमेटी बना दी गयी और जांच के बाद सामने आया कि पार्षद द्वारा लगाये गये आरोप पूरी तौर से सही हैं. पदोन्नति देते वक्त संवर्ग परिवर्तन के साथ-साथ सामान्य प्रशासन विभाग के नियम व वरीयता का भी खयाल नहीं रखा गया.
कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट के मंतव्य में साफ तौर पर कहा है कि उस वक्त के नगर आयुक्त ने अपनी सेवानिवृत्ति के महज आठ दिन पहले ही नियम के विपरीत कर्मचारियों को पदोन्नति दी, जिसे रद्द कर नयी कमेटी बना कर नियम के अनुसार कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाये.
यह भी चल रहा खेल : निगम में कर्मचारी कभी रिटायर्ड नहीं करते. निगम से कर्मचारी रिटायर्ड करते हैं, तो संविदा पर उन्हें उसी पद पर रख लिया जाता है. इतना ही नहीं, प्रभार वाले पद की जिम्मेदारी पहले की तरह ही संविदा पर बहाल कर्मचारी निभाते रहते हैं. निगम सूत्रों का कहना है कि इसकी जानकारी यहां के अधिकारी को होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जाती.
यह नियम कर्मचारी से लेकर इंजीनियर तक लागू हो रहा है. उमेश कुमार कनीय अभियंता अपने कार्यकाल में सहायक अभियंता के प्रभार में रहे, लेकिन रिटायर्ड होने के बाद भी संविदा पर बहाल होकर सहायक अभियंता का प्रभार भी देख रहे हैं. इतना ही नहीं जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र पर रजिस्ट्रार की हैसियत से दस्तखत भी कर रहे हैं.
कमेटी में शामिल : नगर आयुक्त डॉ ईश्वर चंद्र शर्मा द्वारा बनायी गयी कमेटी में वार्ड पार्षद ओम प्रकाश सिंह, धर्मेंद्र कुमार, शम्स तरवेज उर्फ जॉनी, विधानचंद्र नागमणि, गजेंद्र सिंह के अला पदाधिकारी गौतम कुमार शामिल थे. साथ ही इनके सहयोग के लिए स्थापना के इम्तेयाज अली, लेखा सहायक राजकुमार को रखा गया था. इनमें से पहले ही लेखा पदाधिकारी ने कमेटी में रहने से इसलिए इन्कार कर दिया था कि उन्होंने पहले दी गयी कर्मचारियों की पदोन्नति में दस्तखत किया है.
बाद में अन्य लोगों ने जांच प्रतिवेदन नगर आयुक्त को सौपदोन्नति का आधार हाइकोर्ट का आदेशहाइकोर्ट ने कुछ कर्मचारियों की पदोन्नति के मामले में आदेश दिया कि नियम के अनुसार इन्हें पदोन्नति दी जाये. बोर्ड ने हाइकोर्ट के आदेश पर नगर आयुक्त को पदोन्नति के लिए अधिकार दे दिया. पहले से कर्मचारियों द्वारा बनायी गयी लिस्ट को ही नगर आयुक्त ने स्वीकृति दे दी.
इसमें तर्क था कि हाइकोर्ट के आदेश पर पदोन्नति देने का फैसला लिया गया है. जानकारों का कहना है कि हाइकोर्ट भले ही कुछ कर्मचारी गये, लेकिन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नियम के अनुसार पदोन्नति दी जाये. नगर आयुक्त के इस आदेश के बाद कई कर्मचारियों का हक भी मारा गया है. इस आदेश के बाद स्थापना के कर्मचारियों की जल्दबाजी इतनी रही कि 2018-19 के बजट में भी पदोन्नति देकर 19 कर्मचारियों का नाम डाल दिया. इसके बाद ही मामला बोर्ड में उठाया गया.
निगम में यह कोई नयी बात नहीं
निगम के दशक पहले के कर्मचारियों की पदोन्नति को देखा जाये, तो साफ हो जाता है कि उस वक्त भी किसी ने नियम-कानून का पालन नहीं किया है. हर शाखा में संवर्ग परिवर्तन का मामला सामने दिख जायेगा. सफाई काम देखने के लिए फील्ड में बहाल हुए कर्मचारी को ऑफिस में पदोन्नति देकर बैठाया गया. यहां तक ही यह मामला सीमित नहीं रहा है.
सरकार के पत्र के अनुसार किसी अनुकंपा पर बहाल कर्मचारी को अनुकंपा का दोबारा लाभ, पदोन्नति व संवर्ग परिवर्तन नहीं किया जाना निगम में चलता रहा है. निगम सूत्रों का कहना है कि पैरवी व पैसा नहीं देनेवाले कर्मचारी अगर सहायक में बहाल हुए, तो सहायक में ही रिटायर्ड कर जाते हैं. पैरवी व पैसा के बल पर यहां कई कर्मचारियों ने कुली में बहाल होकर भी बाइपास कर तरक्की पा लिया है.
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