Ganga vilas cruise के पर्यटकों ने पटना में कलाकारों के साथ लगाया ठुमके, कहा- वतन जाकर आपके बारे में बताउंगी

Ganga vilas cruise: सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने के बाद विदेशी पर्यटकों ने पटना के कलाकारों के साथ जमकर ठुमके लगाए. इसके साथ ही उन लोगों ने अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि जब मैं लौट कर अपने वतन को जाऊंगी तो आपके नृत्य के बारे में उन लोगों को बताऊंगी.
Saqib khan
वाराणसी से असम के डिब्रूगढ़ तक के अपने 51 दिनों की यात्रा पर निकले गंगा विलास क्रूज ने मंगलवार को आठवें दिन पटना में पड़ाव डाला. पटना में विदेशी सैलानियों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था. सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने के बाद विदेशी पर्यटकों ने पटना के कलाकारों के साथ जमकर ठुमके लगाए. इसके साथ ही उन लोगों ने अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि जब मैं लौट कर अपने वतन को जाऊंगी तो आपके नृत्य के बारे में उन लोगों को बताऊंगी. गंगा विलास क्रूज के पर्यटकों के लिए मंगलवार को पटना स्थित बिहार संग्रहालय में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा ही वाक्य देखने को मिला.

इस कार्यक्रम में पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता की बिहार टीम ‘शुरांगन’ की तरफ से ‘बारामासा’ नृत्य नाटिका की प्रस्तुति की गई. स्थानीय कलाकारों के द्वारा भोजपुर का प्रसिद्ध चैता और होली गीत के अलावा कई तरह की प्रस्तुति दी गई. चैता और होली गीत की प्रस्तुति कर रहे सुदामा पांडे की डांस के पर्यटक दीवाना कर दिया. सुदामा पांडे के नृत्य के दौरान पर्यटक उनके साथ झूमने लगे और जोर-जोर से तालियां बजाने लगे. इससे पहले उनके पटना के बिहार म्यूजियम पहुंचने शानदार स्वागत हुआ. म्यूजियम के मेन गेट पर बड़ी संख्या में आम लोग और एक पार्टी विशेष के कार्यकर्ताओं ने सैलानियों को गुलाब का फूल भेंट कर स्वागत किया.

अंदर पहुंचने पर बिहार म्यूजियम और पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, भारत सरकार द्वारा म्यूजियम के प्रवेश द्वार पर परम्परागत तरीके से उनका स्वागत किया गया. सैलानियों के इस दल में स्विटजरलैंड के 27 और जर्मनी के 5 सैलानी शामिल थे. उन्होंने बिहार म्यूजियम में लगभग डेढ़ घंटे तक समय व्यतीत किया. उन्होंने बिहार म्यूजियम के औरियेन्टेशन गैलरी के साथ-साथ विभिन्न गैलरी में प्रदर्शित पुराअवशेषों को देखा और इनकी जानकारी ली. ओरिएंटेशन गैलरी में ऑडियो विजुअल माध्यम से बिहार के गौरवशाली इतिहास से उनका परिचय कराया गया.

बिहार संग्रहालय के आर्किटेक्चर को देखकर विदेशी पर्यटकों ने इसकी जमकर तारीफ की और इसे विश्व का अद्वितीय म्यूजियम बताया. उन्होंने आर्ट गैलरी में लगी वरिष्ठ कलाकार संजय कुमार की कलाकृतियों को भी देखा और जमकर इसकी तारीफ की. विदेशी सैलानियों ने बिहार म्यूजियम में जमकर तस्वीरें भी ली और इस पल को यादगार बनाया.

बिहार म्यूजियम की विभिन्न गैलरी को देखने के बाद विदेशी सैलानियों ने बिहार म्यूजियम के मुक्तावकाश मंच में पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सौजन्य से आयोजित संगीत एवं नृत्य का भी आनंद लिया. बिहार के कलाकारों ने नृत्य एवं लोकगायन के माध्यम से बिहार की पारम्परिक लोक संस्कृति को बारहमासा नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया. उन्होंने अपनी प्रस्तुति में चैता, छठ गीत, वट सावित्री पूजा गीत, होली गीत, कजरी गीत, विदाई गीत, साेहर गीत गाया. इसमें मुख्य कलाकार हरिकृष्ण सिंह मुन्ना और सुदामा पांडेय समेत कई अन्य ने शानदार प्रस्तुति दी. इसके गायक मो. जॉनी और स्वेत प्रीति थी. प्रस्तुति का नृत्य निर्देशन जितेंद्र कुमार ने किया जबकि सूत्रधार सुदीपा बोस थी.

इस अवसर पर बिहार म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा, उप निदेशक सुनील कुमार झा, संग्रहाध्यक्ष मौमिता घोष, संग्रहाध्यक्ष-सह-प्रभारी अपर निदेशक (प्रशासनिक ) रणवीर सिंह राजपूत, संग्रहालीय सहायक डॉ रवि शंकर गुप्ता, डॉ० विशि उपाध्याय, संग्रहालय सहायक स्वाति सिंह एवं बिहार संग्रहालय की टीम भी उपस्थित थे.
बिहार म्यूजियम में विदेशी सैलानियों का स्वागत करने के लिए पाटलिपुत्र के सांसद रामकृपाल यादव भी मौजूद थे. इस मौके पर उन्होंने कहा कि ऐसा संभवतः पहली बार हो रहा है, जब इतनी बड़ी तादाद में सैलानी नदी मार्ग के रास्ते भ्रमण करते हुए भारत को देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब सैलानी भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जाएंगे तो वहां की सभ्यता, संस्कृति, विरासत, खूबसूरती को अपने साथ ले जाएंगे, जिसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि गंगा विलास क्रूज की यात्रा प्रधानमंत्री के वसुधैव कुटुंबकम के सपने को चरितार्थ करेगी. उन्होंने कहा कि क्रूज यात्रा से बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
सैलानी पटना स्थित गोलघर भी गए, जहां उन्होंने उस ऐतिहासिक धरोहर को देखा और अपने कैमरे में कैद किया. इसे देख सैलानियों ने कहा कि बिना किसी पीलर के बनी यह इमारत अदभुत है, इसका संरक्षण होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसे देख सके. इस मौके पर पर्यटन मंत्रालय के पटना स्थित कार्यालय के निदेशक नीलकंठ ने सैलानियों को गुलाब भेंट कर स्वागत किया. उन्होंने सैलानियों को ऐतिहासिक गोलघर की महत्ता के बारे में जानकारी दी.
एमवी गंगा विलास उत्तर प्रदेश के वाराणसी से अपनी यात्रा शुरू करते हुए 51 दिनों में लगभग 3,200 किलोमीटर की यात्रा करके भारत और बांग्लादेश में 27 नदी प्रणालियों को पार करते हुए बांग्लादेश के रास्ते असम के डिब्रूगढ़ तक पहुंचेगा. एमवी गंगा विलास में सभी लक्जरी सुविधाओं के साथ तीन डेक, 36 पर्यटकों की क्षमता वाले 18 सुइट हैं. पहली यात्रा में स्विट्जरलैंड के 32 पर्यटक पूरी यात्रा के लिए जा रहे हैं.
एमवी गंगा विलास क्रूज को दुनिया के सामने देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया गया है. विश्व धरोहर स्थलों, राष्ट्रीय उद्यानों, नदी घाटों और बिहार में पटना, झारखंड में साहिबगंज, पश्चिम बंगाल में कोलकाता, बांग्लादेश में ढाका और असम में गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों सहित 50 पर्यटन स्थलों की क्रूज की 51 दिनों की यात्रा की योजना बनाई गयी है. यह यात्रा पर्यटकों को एक शानदार अनुभव देगी और भारत और बांग्लादेश की कला, संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिकता में शामिल होने का अवसर देगी.
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