बिहार में नहीं मिले नियोजित शिक्षकों के फोल्डर, 53000 शिक्षकों को प्रमाणपत्र दिखाने का अंतिम मौका, जल्द मिलेगा नोटिस

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 09 Jan 2021 6:11 AM

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प्रदेश में वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त तीन लाख 53 हजार 017 नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच पांच साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है.

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पटना. प्रदेश में वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त तीन लाख 53 हजार 017 नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच पांच साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है. नियोजन इकाइयों और शिक्षकों की लापरवाही के कारण अब भी करीब 53 हजार नियोजित शिक्षकों के फोल्डर नहीं मिले हैं.

शिक्षा विभाग इन सभी िशक्षकों को सार्वजनिक नोटिस जारी करने जा रहा है. दरअसल, शिक्षा विभाग ने माना है कि दस्तावेज उपलब्ध न कराने की जवाबदेही सीधे शिक्षक की है. अब नियोजन इकाई नहीं, खुद शिक्षक को अपने दस्तावेज जांच के लिए मुहैया कराने होंगे. अगर ये शिक्षक अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाते हैं तो माना जायेगा कि उनके दस्तावेज फर्जी हैं.

अंत में उनकी नियुक्ति को अमान्य करने का प्रस्ताव बनाया जायेगा. यह अहम निर्णय शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को शिक्षा विभाग और निगरानी ब्यूरो के शीर्ष अफसरों की संयुक्त बैठक में लिया गया. सूत्रों के मुताबिक शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए वेव पोर्टल बनाया जा रहा है.

यह सार्वजनिक होगा. इस वेव पोर्टल पर नियोजित शिक्षकों को अपने फोल्डर के सभी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. यहीं से विभिन्न बोर्ड उन दस्तावेजों को लेकर उसकी वैधता की जांच कर लेंगे. सूत्रों के मुताबिक िशक्षा िवभाग के प्रधान सचिव ने िनर्देश िकया कि जांच को तेजी से पूरा करने की जरूरत है.

इसे अब हर हाल में पूरा करना होगा. बैठक में उम्मीद जाहिर की गयी कि मार्च तक जांच पूरी कर ली जायेगी. बैठक में निगरानी के एडीजी सुनील कुमार झा ने जांच की प्रगति और उसके दुविधाओं के बारे में बताया.

उल्लेखनीय है कि निगरानी ब्यूरो को एक लाख तीन हजार 917 शिक्षकों के फोल्डर नहीं मिले थे. इसको लेकर शिक्षा विभाग ने सभी डीइओ के माध्यम से नियोजन इकाइयों को इन फोल्डरों की मांग की थी. इसके बाद इनमें से करीब 50 हजार फोल्डर विभाग को प्राप्त हुए, जिन्हें जांच के लिए पिछले दिनों निगरानी को सौंपा गया.

लेकिन निगरानी ब्यूरो ने इन फोल्डरों को यह कहकर लौटा दिया कि इन के साथ मेरिट सूची संलग्न नहीं है. फिलहाल जिन शिक्षकों को नोटिस जारी होना है, उनकी पहचान कर उनकी जानकारी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दी गयी है. बैठक में निगरानी के डीआइजी रवींद्र प्रसाद और एसपी सुबोध विश्वास आदि अफसर उपस्थित रहे.

दस्तावेज के सत्यापन को दूसरों राज्यों में जायेंगी निगरानी की टीमें

जांच को जल्द-से-जल्द पूरी करने के लिए यूपी, मध्यप्रदेश, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल से जुड़े शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन के लिए निगरानी ब्यूरो वहां टीमें भेजेगा. तमाम नोटिस देने के बाद भी संबंधित राज्यों के बोर्ड अपने दस्तावेजों के सत्यापन में कोई खास रुचि नहीं ले रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि पटना हाइकोर्ट के निर्देश पर निगरानी ब्यूरो शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच कर रहा है. अगर सत्यापन में दस्तावेज गलत पाये जाते हैं तो उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी जा रही है.

44 फीसदी प्रमाणपत्रों की जांच अभी बाकी

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिक्षकों के शिक्षण व प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच चल रही है. सीनियर सेकेंड्री, सेकेंड्री, लाइब्रेरियन और प्राथमिक वर्ग के तीन लाख 53 हजार 17 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच अभी बाकी है.

प्रमाणपत्रों की जांच कर रहे निगरानी के एसपी सुबोध कुमार विश्वास ने शुक्रवार को बताया कि अपडेट रिपोर्ट के अनुसार शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के दो लाख 49 हजार 100 फोल्डर मिले हैं, जबकि प्रमाण पत्रों के एक लाख तीन हजार 917 फोल्डर अभी निगरानी को प्राप्त होने बाकी है.

जिन शिक्षकों के फोल्डर लिये गये हैं, उनके सात लाख 23 हजार 164 प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है. इनमें चार लाख पांच हजार 845 की जांच पूरी की जा चुकी है और तीन लाख 17 हजार 319 यानी 44% प्रमाणपत्रों की जांच अभी बाकी हैं.

वहीं, जांच के बाद 1275 प्रमाणपत्र फर्जी पाये गये हैं. 386 केस रजिस्टर्ड किये गये हैं और 1572 शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है. हाइकोर्ट के आदेश के अनुसार निगरानी ब्यूरो वर्ष 2006 से 2015 तक नियोजित हुए चार वर्गों के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कर रहा है.

इसमें जिलों से मिले एक शिक्षक के प्रमाणपत्रों के बने पूरे फोल्डर की जांच की जा रही है. फोल्डर में शिक्षक आवेदन से लेकर हाइस्कूल, इंटर, स्नातक और बीएड आदि के प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है.

इनमें सबसे अधिक मामले प्राथमिक शिक्षक के हैं. तीन लाख 11 हजार 251 प्राथमिक शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है. इनमें पांच लाख 26 हजार 881 प्रमाणपत्रों को लिया गया है. इनमें दो लाख 40 हजार 812 प्रमाणपत्रों को सत्यापित किया गया है.

दो लाख 86 हजार 69 प्रमाणपत्रों की जांच बाकी है और 1071 प्रमाणपत्र फर्जी पाये गये हैं. 386 केस रजिस्टर्ड किये गये हैं और 1367 प्राथमिक शिक्षकों पर प्राथमिकी की गयी है.

सेकेंड्री शिक्षकों के 69 प्रमाणपत्र फर्जी

प्राथमिक शिक्षक के अलावा सेकेंड्री शिक्षकों के 69 प्रमाणपत्र फर्जी पाये गये हैं. इनमें 42 केस रजिस्टर्ड किये गये हैं और 59 शिक्षकों पर प्राथमिकी की गयी है. सीनियर सेकेंड्री के शिक्षकों के 121 प्रमाणपत्र फेक पाये गये हैं.

53 केस रजिस्टर्ड किये गये हैं और 131 शिक्षकों पर प्राथमिकी की गयी है. उसी प्रकार लाइब्रेरियन के 14 प्रमाणपत्र फर्जी पाये गये हैं और 15 पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है.

Posted by Ashish Jha

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