एकीकृत कृषि प्राणाली: खेती के साथ- साथ किसान करें ये पांच काम, सरकार भी करेगी आर्थिक मदद

किसानों की आमदनी को बढ़ाने और उन्हें खेती के साथ आय के अन्य साधन उपलब्ध करवाने के लिये सरकार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है.बतादें की एकीकृत कृषि प्राणाली को अपनाने पर खेती को छोड़ने की जरूरत नहीं है.
किसानों की आमदनी को बढ़ाने और उन्हें खेती के साथ आय के अन्य साधन उपलब्ध करवाने के लिये एकीकृत कृषि प्राणाली अपनाने के लिये सरकार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. बता दें की एकीकृत कृषि प्राणाली को अपनाने पर खेती को छोड़ने की जरूरत नहीं है.देखा जाए तो ये काम खेती की कई जरूरतों को पूरा करते हैं. इसमें पशुपालन,मुर्गी पालन,मछली पालन,मधुमक्खी पालनऔर मशरूम उत्पादन शामिल है.
मछली पालन किसानों के लिए आर्थिक लाभ का सबब साबित हो रहा है.पहले मछली पालन सिर्फ मछुआरों का काम माना जाता था.लेकिन आज ज्यादातर किसान खेतों में तालाब बनवाकर या टैंकों में मछली पालन कर रहे हैं.इसका एक बड़ा कारण यह है कि वर्ष में दो बार एक तालाब से मछलियां बिक्री के लिए प्राप्त की जा सकती हैं. खेती के साथ मछली पालन को प्रोत्साहित करने के लिये भारत सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की जिसके तहत किसानों को आर्थिक अनुदान का भी प्रावधान है.
भारत में खेती के साथ-साथ पशुपालन का चलन पुराने समय से ही है. देखा जाये तो ये दोनों काम एक-दूसरे के पूरक है. जहां पशुओं के लिये खेतों से हरे चारे का इंतजाम हो जाता है.वहीं गाय,भैंस,बकरी आदि पालने पर खाद की जरूरतें भी पूरी हो जाती है. इस काम में सरकार भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों की मदद कर रही है.
खेती-बाड़ी के अलावा किसानों को और अधिक लाभ कैसे मिल सके इसके लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय मधुमक्खी और शहद मिशन की शुरुआत की है.जिसके तहत किसानों को मधुमक्खी पालन की यूनिट लगाने पर किसानों को सब्सिडी का भी प्रावधान है. किसान खेतीबाड़ी के साथ ही मधुमक्खी पालन कर अपनी आमदनी में बढ़ोतरी कर सकता है.
मुर्गी पालन करके अंडे,पंखों का प्रोडक्शन आदि में कमाई किया जा सकता हैं. भारत में चिकन के साथ-साथ अंडों की खपत काफी बढ़ गई है. जिसके कारण मुर्गीपालन का व्यवसाय से किसानों की आमदनी रातों रात बढ़ सकती है. मुर्गीपालन के लिये अलग से खर्चा करने की जरूरत नहीं होती.कम राशि की मदद से भी मुर्गी पालन की शुरुआत किया जा सकता हैं .
भूमिहीन और छोटे किसान भी मशरूम की आसानी से खेती कर सकते हैं.मशरूम उगाने के लिये खेत-खलिहानों की जरूरत नहीं पड़ती .मशरूम उत्पादन कमरे में किया जाता है. भारत में मशरूम उत्पादन काफी प्रचलन में है. यहां तक कि भारत में उगे हुये मशरूम विदेशों में निर्यात किये जा रहे हैं.जिस कारण इसकी खेती फायदे का सौदा साबित हो सकती है.
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