छह महीने बाद भी नौ लाख बच्चों को नहीं मिली किताब, शिक्षा विभाग ने प्रकाशकों को दी है किताब देने की जिम्मेदारी

Updated at : 05 Oct 2021 12:44 PM (IST)
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छह महीने बाद भी नौ लाख बच्चों को नहीं मिली किताब, शिक्षा विभाग ने प्रकाशकों को दी है किताब देने की जिम्मेदारी

विभाग की लापरवाही से संकट खड़ा हो गया है. विभाग की ओर से पहली से आठवीं कक्षा के लिए 8.95 लाख सेट किताब की डिमांड राज्य मुख्यालय को भेजी गयी थी, जिसमें केवल पांच हजार छात्र-छात्राओं को ही किताब मिल सकी हैं.

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मुजफ्फरपुर जिले के 8.90 लाख बच्चों को पढ़ाई शुरू होने के छह महीने बाद भी किताब नहीं मिल सकी हैं. ऐसे में बच्चे किस तरह पढ़ाई करें, यह चिंता अभिभावकों को सता रही है. पहले ही कोरोना के कारण काफी नुकसान हो चुका है. अब विभाग की लापरवाही से संकट खड़ा हो गया है. विभाग की ओर से पहली से आठवीं कक्षा के लिए 8.95 लाख सेट किताब की डिमांड राज्य मुख्यालय को भेजी गयी थी, जिसमें केवल पांच हजार छात्र-छात्राओं को ही किताब मिल सकी हैं. शिक्षा विभाग ने बच्चों को किताब उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निजी प्रकाशकों को दी है. 30 सितंबर तक का लक्ष्य रखा गया था. संकुल स्तर पर पुस्तक क्रय मेला लगाने को कहा गया था, लेकिन 251 में केवल तीन संकुलों में ही किताब उपलब्ध करायी गयी. वर्तमान सत्र अप्रैल से शुरू हुआ है.

विभाग दे रहा बच्चों को पैसा, खुद खरीदेंगे किताब

पहली से आठवीं क्लास के बच्चों को किताब के लिए विभाग की ओर से पैसा दिया जा रहा है. छात्र या उनके अभिभावक के एकाउंट में यह राशि सीधे भेजी जा रही है. वहीं प्रकाशक पुस्तक क्रय मेला लगायेंगे, जहां से बच्चे खुद किताब खरीदेंगे. क्लास के अनुसार किताबों के सेट की राशि तय की गयी है. प्रकाशकों ने जो किताबें उपलब्ध करायी है, उसमें कई क्लास का अधूरा सेट ही है.

ऑनलाइन पढ़ाई भी चौपट, शिक्षक उदासीन

बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी चौपट हो चुकी है. विभाग के साथ ही शिक्षकों की उदासीनता इसकी मुख्य वजह है. इसका खुलासा विभाग की पिछले महीने जारी रिपोर्ट में हुआ. ऑनलाइन पढ़ाई के लिए तैयार इ-लॉट्स (इ-लाइब्रेरी फॉर टीचर्स एंड स्टूडेंट्स) पोर्टल से शिक्षक खुद तो जुड़ गये, लेकिन बच्चों को इसके बारे में बताना मुनासिब नहीं समझा.

पोर्टल पर जिले से 3213 विजिटर्स जुड़े थे, जिसमें 1947 शिक्षक थे. वहीं 1117 स्टूडेंट्स ही जुड़ सके. इसके अलावा 102 पैरेंट्स व 47 अन्य लोगों ने भी इसे देखा था. यह पोर्टल 13 मई को लांच किया गया, जिस पर पहली से 12वीं क्लास तक के लिए लर्निंग मैटीरियल उपलब्ध है.

अमरेंद्र कुमार पांडेय डीपीओ ने कहा कि जिले से पहली से आठवीं क्लास के लिए 8.95 लाख सेट पुस्तक की डिमांड की गयी थी. इसमें पहली क्लास के लिए किताब अभी नहीं मिलनी है. दूसरी से आठवीं क्लास की किताबों के आठ लाख से अधिक सेट सितंबर में उपलब्ध कराने के लिए प्रकाशकों को कहा गया था. अबतक केवल पांच हजार सेट किताबें ही जिले को मिली हैं. और किताबें कब तक मिलेंगी, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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