Bihar Politics: FIR के बाद शिक्षा मंत्री के बदले बोल, खुद को बताया शबरी के जूठे बेर खाने वाले श्रीराम का भक्त

Updated at : 09 Jan 2024 7:15 PM (IST)
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Bihar Politics: FIR के बाद शिक्षा मंत्री के बदले बोल, खुद को बताया शबरी के जूठे बेर खाने वाले श्रीराम का भक्त

हिंदू शिव भवानी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष लव कुमार सिंह ने शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर के विरुद्ध थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. इधर मंदिर पर विवादित बयान देने वाले मंत्री के बोल भी अब बदल गए हैं. उन्होंने खुद को राम भक्त बताया है.

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बिहार के शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर आए दिन अपने विवादित बयानों की वजह से चर्चा में बने हुए रहते हैं. सोमवार को भी उनके द्वारा दिए गए एक बयान ने तूल पकड़ लिया. जिसके बाद इस मामले में हिंदू शिव भवानी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष लव कुमार सिंह ने शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर सिंह पर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए पटना के कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दी है. उन्होंने बताया है कि शिक्षा मंत्री ने मंदिर को गुलामी का रास्ता बता कर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाया है. इससे सभी आहत हैं. इसके बाद अब शिक्षा मंत्री के सुर भी बदल गए हैं. उन्होंने खुद को प्रभु श्रीराम का भक्त बताते हुए कहा है कि मैं शबरी के जूठे बेर खाने वाले, अहिल्या के तारण हार और त्याग की प्रति मूर्ति श्रीराम का भक्त हूं.

समाज को जाग्रत करने की जिम्मेदारी हम समाजवादियों की : शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री की तरफ से सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया गया. जिसमें कहा गया है कि शबरी और अहिल्या के बेटे-बेटियों को मंदिर जाने से रोकने और अपवित्र समझ कर मंदिर को गंगाजल से धोने वाले और धर्म के नाम पर धंधा करने वालों के खिलाफ समाज को जाग्रत करने की जिम्मेदारी हम समाजवादियों की है.

मैं मनुवादियों के खिलाफ : शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर

शिक्षा मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने कहा कि मैं हिंदू धर्म को छूत-अछूत में बांटने वाले षड़यंत्रकारियों और मनुवादियों के खिलाफ हूं. मेरी यह लड़ाई जीवंत पर्यंत जारी रहेगी. मेरा प्रयास है कि आम आवाम को धर्म का व्यापार करने और धर्म की राजनीति करने वालों के प्रति लोगों को सचेत किया जाये.

ईश्वर किसी जाति के दास नहीं : प्रो चंद्रशेखर

प्रो चंद्रशेखर ने जोर देकर कहा कि क्या ऐसे तत्वों को यह बताने की हिम्मत है कि मनुवाद की तरफ से धर्म की आड़ में अस्पृश्य कुल में जन्म लेने वाले बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर ही क्यों अकेले भारतीय हैं, जिन्हें सदी के ज्ञान के प्रतीक के रूप में विश्व जानता है. मेरा मानना है कि ईश्वर किसी जाति के दास नहीं हैं. अन्यथा शूद्रों और नारियों को तो मनुवादी धर्म में शिक्षा व संपत्ति का अधिकार भी नहीं था. धर्म को धंधा बनाकर राजनीति करने वाले भाजपाइयों से इसका मैं जवाब चाहता हूं.

शिक्षा मंत्री ने भाजपा से किया सवाल

शिक्षा मंत्री ने सवाल उछाला कि क्या भाजपा को शिक्षण संस्थाओं में जाने वाले बच्चों एवं उनके माता-पिता के वोट नहीं चाहिए. क्या उन्हें रोजगार तलाशने वालों के वोट नहीं चाहिए? भाजपा वालों को ध्यान रखना चाहिए कि जीविका का यक्ष प्रश्न जीवन में अधिक प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि मुझे भाजपा वालों की प्रतिक्रिया का इंतजार है.

मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया : शिक्षा मंत्री

मंदिर का मतलब मानसिक गुलामी का रास्ता और स्कूल का मतलब जीवन में प्रकाश का रास्ता वाले अपने बयान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि देश की प्रथम महिला शिक्षिका व नारी शिक्षा की प्रतिमूर्ती माता सावित्रीबाई फूले द्वारा कभी यह कहा गया था कि, उन्हीं के बयानों को दोहराया गया है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया.

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