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Darbhanga News: बीएचयू, एएमयू, केएसडीएसयू समेत कई विश्वविद्यालयों की स्थापना में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह का अविस्मरणीय योगदान

Updated at : 12 Nov 2025 8:54 PM (IST)
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Darbhanga News: बीएचयू, एएमयू, केएसडीएसयू समेत कई विश्वविद्यालयों की स्थापना में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह का अविस्मरणीय योगदान

Darbhanga News:कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्थापक महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह की 119वीं जयंती बुधवार को मनायी गयी.

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Darbhanga News: दरभंगा. प्राच्य विद्या के पोषक तथा सनातन विचारों के अव्वल हिमायती, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्थापक महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह की 119वीं जयंती बुधवार को मनायी गयी. विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में आयोजित जयंती समारोह में पूर्व कुलपति डॉ रामचंद्र झा ने कहा कि महाराजाधिराज सर्व धर्म सम भाव के धनी थे. शिक्षा, उद्योग, धर्म आदि सभी क्षेत्रों के समेकित विकास के वे अगुआ थे. बीएचयू, एएमयू, केएसडीएसयू समेत कई विश्वविद्यालयों की स्थापना में उनका योगदान अविस्मरणीय है. वे हमेशा प्राच्य विषयों के साथ सनातन धर्म के उत्थान व विकास के लिए समाज को प्रेरित करते रहते थे. इसी क्रम में डॉ झा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा व सनातनी विचार, बिना संस्कृत को जाने-समझे संभव नहीं है. विश्व स्तर पर पनपी अराजकताओं पर लगाम लगाने के लिए सनातन धर्म को मजबूत करना ही होगा.

विशाल व कीर्तिमय था महाराजाधिराज का व्यक्तित्व- प्रो. पुरेंद्र

अध्यक्षता करते हुए छात्र कल्याण अध्यक्ष सह प्रभारी कुलपति प्रो. पुरेंद्र वारिक ने कहा कि महाराजाधिराज का व्यक्तित्व विशाल व कीर्तिमय था. वे दान वीर थे. छुआछूत को समाज के लिए कलंक मानते थे. प्रगतिशील विचारों के समर्थक महाराजाधिराज द्वारा किये गए पुनीत कार्यों को गिनाना असंभव है.

देश व समाज के लिए असाधारण योगदान को लेकर महाराजाधिराज को मिले भारतरत्न- प्रो. ब्रजेशपति

कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने कहा कि कला, शिक्षा के साथ- साथ महाराजाधिराज चिकित्सा सुविधा के भी प्रेमी थे. खासकर देशी चिकित्सा को वे बढ़ावा देते थे. रोजगार के लिए कई उद्योगों लगाया. उस जमाने में भी समस्त तकनीकी बाधाओं को दूर करते हुए उन्होंने क्षेत्रीय भाषा को विकसित व मजबूत करने के लिए कई कदम उठाये. संस्कृत को आगे लाने के लिए उन्होंने 1951 में कबड़ाघाट में मिथिला स्नातकोत्तर संस्कृत शोध संस्थान की नींव रखी. उनकी सोंच राष्ट्र व्यापी थी. देश व समाज के लिए असाधारण योगदान को लेकर महाराजाधिराज को भारत रत्न दिए जाने की मांग की, जिसका सभी ने ताली बजाकर समर्थन किया. यह जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने बताया कि कार्यक्रम का संचालक डॉ यदुवीर स्वरूप शास्त्री, स्वागत डॉ शंभुशरण तिवारी व धन्यवाद ज्ञापन डॉ एल सविता आर्या ने किया.

समाधिस्थल पर की गयी पूजा-अर्चना

इसके पूर्व सुबह माधवेश्वर परिसर में महाराजाधिराज के समाधिस्थल पर पूजा अर्चना की गई. धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार झा मुख्य यजमान, जबकि पंडित का दायित्व परीक्षा नियंत्रक डॉ ध्रुव मिश्र ने निभाया. ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष डॉ कुणाल झा समेत विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्रों की दोनों कार्यक्रमों में उपस्थिति रही.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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