ePaper

Darbhanga News: प्राच्य विद्या के क्षेत्र में भुलाया नहीं जा सकता राज परिवार का अवदान

Updated at : 13 Jan 2026 10:37 PM (IST)
विज्ञापन
Darbhanga News: प्राच्य विद्या के क्षेत्र में भुलाया नहीं जा सकता राज परिवार का अवदान

Darbhanga News:महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी के निधन पर कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय की अध्यक्षता में शोक सभा हुई.

विज्ञापन

Darbhanga News: दरभंगा. दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी के निधन पर कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय की अध्यक्षता में शोक सभा हुई. इसमें दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट मौन रखा गया. कुलपति प्रो. पांडेय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राज परिवार का पूरा मिथिला ऋणी है. खासकर प्राच्य विद्या के क्षेत्र में राजपरिवार का अवदान कोई भूल नहीं सकता. महारानी कामसुन्दरी भी संस्कृत शिक्षा को बढ़ाने में हमेशा सहयोग करती रही. उनके नाम पर विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति दी जा रही है.

महाराजाधिराज जैसे दानवीर इतिहास में विरले- कुलसचिव

कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने कहा कि महाराजाधिराज जैसे दानवीर इतिहास में विरले हैं, जिन्होंने प्राच्य शिक्षा के लिए अपने आवास तक को दान में दे दिया. हम सभी उनके परिवार के प्रति आभारी हैं. प्रो. दयानाथ झा ने महारानी अधिरानी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला.

संस्कृत विश्वविद्यालय के सीनेट की आजीवन सदस्या रही महारानी

पीआरओ निशिकांत के अनुसार संस्कृत विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कर्मियों ने महारानी के निधन को अपूरणीय क्षति बताया. महारानी अधिरानी बिहार के सबसे बड़े न्यास की ट्रस्टी थी. वे अंतिम सांस तक समाजिक सरोकारों से जुड़ी रही. संस्कृत विश्वविद्यालय के सीनेट की वे आजीवन सदस्या थी. उन्होंने लाचारों व गरीबों को हमेशा सहयोग किया. कर्मचारी नेता रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि अगर राजपरिवार ने अपनी महान उदारता नहीं दिखाया होता, तो आज मिथिला के हजारों घरों में बेफिक्री से चूल्हा नहीं जलता. शोक सभा मे विश्वविद्यालय के शिक्षक, पदाधिकारी एवं कर्मी शामिल थे.

लनामिवि के राज पुस्तकालय ने महारानी को दी श्रद्धांजलि

दरभंगा.

महारानी काम सुंदरी देवी को लनामिवि स्थित महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह सामाजिक विज्ञान संस्थान एवं शोध पुस्तकालय की ओर से श्रद्धांजलि दी गयी. शोक सभा में निदेशक प्रो. दमन कुमार झा ने कहा कि महारानी इस संस्थान में प्रारंभिक काल से सदस्य रही. राज परिवार द्वारा समर्पित हजारों दुर्लभ पुस्तकें, पांडुलिपियां उनके साहित्य और संस्कृति के संवर्द्धन को लेकर अविस्मरणीय रहेगा. दो मिनट का मौन रख कर उनकी आत्मा की शान्ति के लिए सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की. शोक सभा में डॉ संतोष कुमार झा, कुमारी अनीता, सीधेश्वर पासवान, अरुण कुमार राम आदि शामिल थे.

मिथिला की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक चेतना की प्रेरणास्रोत थी महारानी

दरभंगा

. रमेश्वरलता संस्कृत कॉलेज में मंगलवार को महारानी कामसुंदरी देवी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा की गयी. उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन करते हुये दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गयी. अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ दिनेश झा ने महारानी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. कहा कि वे मिथिला की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक चेतना की वह प्रेरणास्रोत थी. डॉ पवन कुमार झा ने कहा कि महारानी का जीवन त्याग, सेवा और संस्कारों से परिपूर्ण था, जो आज की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है. डॉ रामसेवक झा ने कहा कि जिस परंपरा को महारानी ने स्थापित किया, उसी के आलोक में आज भी मिथिला की सांस्कृतिक पहचान जीवंत है. संचालन डॉ मुकेश कुमार निराला ने किया. शोक सभा में डॉ मैथिली कुमारी, डॉ सुनील कुमार, पंकज मोहन झा, दीपक कुमार, मदन कुमार झा आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
PRABHAT KUMAR

लेखक के बारे में

By PRABHAT KUMAR

PRABHAT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन