दरभंगा संग्रहालय की दुर्लभ धरोहर बचाने की मांग, पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष ने पीएम को लिखा पत्र

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फोटो- 3परिचय- हाथी दांत से बनी कलाकृति. | Prabhat Khabar Network

हाथी दांत से बनी कलाकृति.

महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा की अमूल्य कलाकृतियां उपेक्षा का शिकार हैं. हाथी दांत और काष्ठ से बनी अनमोल धरोहरों के संरक्षण की मांग प्रधानमंत्री से की गई है. सात साल से लंबित संरक्षण कार्य पर सवाल उठाए गए हैं.

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Darbhanga News: महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा में संरक्षित हाथी दांत एवं काष्ठ निर्मित दुर्लभ पुरावशेषों और कलावस्तुओं के संरक्षण की मांग प्रधानमंत्री से की गई है. पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष एवं इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) बिहार स्टेट के को-कन्वेनर डॉ. शिव कुमार मिश्र ने पीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर संस्कृति मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.

दुर्लभ धरोहरों के संरक्षण की उठाई मांग

डॉ. शिव कुमार मिश्र ने शिकायत में कहा कि महाराजा रमेश्वर सिंह ने वर्ष 1900 से 1929 के बीच मुर्शिदाबाद के कलाकारों से हाथी दांत की अनेक दुर्लभ कलाकृतियां बनवाई थीं. इनमें महिषासुरमर्दिनी, राजसिंहासन, पालकी, हाथी का हौदा, पलंग, सोफा, कुर्सी, टेबल, ज्वेलरी बॉक्स, दर्पण और अन्य कलावस्तुएं शामिल हैं. इसके अलावा काष्ठ निर्मित भगवान बुद्ध के जन्म दृश्य, मंदिर प्रतिकृतियां, मगरमच्छ, मछली, कछुआ, ड्रेसिंग टेबल और अन्य कलाकृतियां भी संग्रहालय की अमूल्य धरोहर हैं.

सात साल बाद भी पूरा नहीं हुआ संरक्षण कार्य

शिकायत के अनुसार वर्ष 2019 में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एनआरएलसी, लखनऊ और संग्रहालय प्रशासन के बीच 155 पुरावशेषों के संरक्षण का समझौता हुआ था. तीन वर्ष में कार्य पूरा होना था और इसके लिए बिहार सरकार ने 1.65 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे. आरोप है कि सात वर्ष बीतने के बाद भी संरक्षण कार्य पूरा नहीं हुआ और कई महत्वपूर्ण कलावस्तुएं अब भी उपेक्षित पड़ी हैं.

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

डॉ. मिश्र ने प्रधानमंत्री से संस्कृति मंत्रालय को तत्काल संरक्षण कार्य पूरा कराने का निर्देश देने और विरासत की उपेक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि दरभंगा संग्रहालय में संरक्षित हाथी दांत की कलाकृतियां देश में अपनी तरह का अद्वितीय संग्रह हैं और इनके संरक्षण में देरी सांस्कृतिक विरासत के लिए गंभीर खतरा है.


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Satish Kumar

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