फ्लॉप साबित हो रही है पैक्स के माध्यम से गेहूं खरीद की योजना
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 03 May 2024 11:46 PM
पैक्स के माध्यम से किसानों से गेहुं खरीद की सरकारी योजना फ्लॉप साबित हो रही है.
बेनीपुर. पैक्स के माध्यम से किसानों से गेहुं खरीद की सरकारी योजना फ्लॉप साबित हो रही है. सरकार ने प्रखंड के 22 पैक्सों को किसानों से सरकारी दर पर गेहूं खरीद करने का आदेश दिया है. सभी पैक्स किसानों से गेहूं खरीद के लिए दुकान खोले बैठे रहे, परंतु एक भी किसान किसी पैक्स के यहां गेहूं बेचने नहीं आ रहे. पैक्स अध्यक्ष किसानों के आने की प्रतीक्षा में हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं, जबकि धान अधिप्राप्ति के समय किसान पैक्स अध्यक्ष को खोजते रहते हैं. इसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा बाजार से सरकारी मूल्य कम निर्धारण किया जाना है. ज्ञात हो कि कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष गेहूं की न्यूनतम मूल्य 22.50 रुपये प्रति किलो निर्धारित कर सहकारिता विभाग को पैक्स के माध्यम से किसानों की गेहूं खरीदने का आदेश दिया गया है. कम मूल्य होने के कारण किसान सरकार के हाथों गेहूं बेचने से मुंह मोड़ रहे हैं. किसान गगन झा बताते हैं कि इस बार गेहूं की उपज अच्छी नहीं हुई है. लागत के अनुरूप गेहूं की खेती इस बार घाटे की साबित हो रही है. उपर से सरकार ने न्यूनतम मूल्य निर्धारित कर रखा है. इससे अधिक दाम तो खुले बाजार में व्यापारियों से मिल रहा है तो पैक्स के माध्यम से गेहूं क्यों बेचे. खुले बाजार में व्यापारियों के हाथों बेचने से मूल्य भी अधिक मिलता है और भुगतान भी तुरंत हो जाता है. ऐसी स्थिति में इस बार सरकार का भंडार खाली रह सकता है. पोहद्दी के किसान रामचन्द्र यादव बताते हैं कि मंंहगे खाद-बीज लेकर गेहूं की खेती की. पटवन भी महंगी दर पर करना पड़ा. जंगली जानवर के प्रकोप के कारण गेहूं की उपज इस बार कम हुआ. बावजूद सरकार द्वारा गेहूं की निर्धारित मूल्य ने तो किसानों की कमर ही तोड़ डाला. पैक्स के माध्यम से गेहूं बेचने में तो घाटा ही घाटा है. इस संबंध में पूछने पर बीसीओ शशि कुमार ने कहा कि इस बार भी किसान पैक्स के माध्यम से गेहूं नहीं बेचना चाह रहे हैं. अभी तक मात्र पंचायत के एक किसान ने 25 क्विंटल गेहूं पैक्स के माध्यम से बेचा है, वह भी पैक्स अध्यक्ष ही. उन्होंने कहा कि गेहूं की निर्धारित सरकारी मूल्य बाजार भाव से बहुत कम है. इसके कारण किसान पैक्स के माध्यम से गेहूं बेचना नहीं चाह रहे हैं. उन्होंने किसानों से अपनी उपज की मात्र 10 प्रतिशत गेहूं पैक्स को देने तथा 90 फीसदी खुले बाजार में ही बेचने की अपील की है, ताकि सरकार के भंडारण में भी कुछ गेहूं प्राप्त हो सके.
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