नवंबर में पत्नी व बच्चों के साथ दिघियार आया था उमेश

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नवंबर में पत्नी व बच्चों के साथ दिघियार आया था उमेश

दिघियार गांव के पासवान टोला में मातम छाया है. परिजनों के मन से उमेश पासवान के परिजनों की तस्वीर ओझल नहीं हो पा रही है.

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केवटी. दिघियार गांव के पासवान टोला में मातम छाया है. परिजनों के मन से उमेश पासवान के परिजनों की तस्वीर ओझल नहीं हो पा रही है. हंसता-खेलता परिवार था. अभी पिछले ही साल नवंबर में उमेश पासवान पत्नी व बच्चों के साथ अपने गांव दिघियार आया था. कुछ दिन यहां रुका. फिर पंजाब जाने से पहले सबको वापस ससुराल छोड़ कर आया था. उमेश की बहन रूची देवी ने बताया कि भाभी एवं भतीजा-भतीजी का चेहरा आंखों से ओझल नहीं हो रहा है. नवंबर में जाने के समय भाभी ने कहा था कि अब घर बनाकर दिघियार में ही रहेंगे. यह कहते-कहते उसका गला रुध गया. बस मुंह से एक ही बात बार-बार निकल रही थी, ईश्वर ने भैया की दुनिया ही उजाड़ दी. बचपन में ही माता-पिता को खोने के बाद पत्नी व बच्चों के साथ दुनिया फिर से बस गयी थी. उपरवाले को यह भी नहीं भया. उनके परिवार उजाड़ दिया. इसी तरह आजाद पासवान ने बताया कि चाची कंचन देवी सहित तीन बच्चों की दर्दनाक मौत से पूरे टोले में मायूसी छा गई है. वहीं रूची व आजाद के चीत्कार से माहौल गमगीन हो रहा था. सांत्वना देने पहुंच रहे लोग भी परिजनों के चीत्कार से अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे. अधिकांश घर में चूल्हा नहीं जला.

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