दरभंगा: जाले में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण, डॉ. दिव्यांशु ने कहा- मशरूम मुनाफे और तंदुरुस्ती का नया सुपरफूड
प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेती महिलाएं और जानकारी देते कृषि वैज्ञानिक
जाले में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में 37 महिलाओं को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने इसे कम लागत में अधिक मुनाफा और बेहतर पोषण देने वाला व्यवसाय बताया. पढ़ें पूरी खबर…
जाले दरभंगा से केशवेन्द्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट
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Darbhanga News: कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा मशरूम उत्पादन तकनीक पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में जाले क्षेत्र की 37 महिलाओं ने भाग लेकर मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी प्राप्त की.
पोषण और आय का बेहतर माध्यम है मशरूम
केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने कहा कि वर्तमान समय में मशरूम पोषण और आय दोनों का बेहतर माध्यम बनकर उभरा है. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और रोजगार के नए अवसरों की तलाश के बीच मशरूम किसानों तथा छोटे उद्यमियों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो रहा है.
उन्होंने कहा कि कम जगह, कम लागत और कम समय में मशरूम का उत्पादन कर अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है.
महिलाओं को सिखाई गई उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक
प्रशिक्षण की संचालिका गृह वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी ने प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती के लिए धान या गेहूं के भूसे को कीटाणुरहित कर उसमें मशरूम के बीज (स्पॉन) मिलाकर पॉलीबैग में भरा जाता है.
इसके बाद बैगों को नियंत्रित तापमान वाले अंधेरे कमरे में रखा जाता है. कवक जाल पूरी तरह फैलने के बाद पर्याप्त नमी, ताजी हवा और हल्की रोशनी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे कुछ ही दिनों में मशरूम तैयार हो जाता है. उन्होंने बताया कि एक बैग से तीन से चार बार तक उत्पादन लिया जा सकता है.
खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को किया गया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, वैज्ञानिक खेती अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया गया. डॉ. पूजा कुमारी ने कहा कि अभियान का उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाना है.
स्वरोजगार के प्रति बढ़ी रुचि
प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा, इंजीनियर निधि कुमारी और फार्म मैनेजर डॉ. चंदन कुमार भी उपस्थित थे. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने मशरूम उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारी प्राप्त की और इसे स्वरोजगार के रूप में अपनाने में रुचि दिखाई.
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