Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी दर्शनशास्त्र विभाग में “महावीर का जीवन और कार्य ” विषय पर विभागाध्यक्ष डॉ शिवानंद झा की अध्यक्षता में संगोष्ठी हुई. पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ अमरनाथ झा ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन, मानवता के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करता है. यह आदर्श आज भी उतना ही प्रासंगिक. कुछ आदर्श मानवता की जीवंतता के लिए सदैव अस्तित्व में बने रहते हैं. वे कालजीवी रहे. कहा कि महावीर केवल धार्मिक गुरु नहीं, बल्कि क्रांतिकारी चिंतक थे. उन्होंने समाज को सत्य, अहिंसा और तपस्या के माध्यम से सींचने की एक नई दृष्टि दी. उनका नैतिक संदेश आज भी सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक समस्याओं के समाधान के लिए बेहद प्रासंगिक है.
महावीर से प्रेरणा लेकर अहिंसा, आत्मानुशासन और करुणा को जीवन में दें स्थान
पूर्व अध्यक्ष डॉ रुद्र कांत अमर ने कहा कि महावीर द्वारा प्रतिपादित ””””त्रिरत्न”””” अर्थात् सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र आत्मोन्नति का मार्ग है तथा सामाजिक समरसता का नींव है. महावीर से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में अहिंसा, आत्मानुशासन और करुणा को स्थान देने का आग्रह छात्रों से किया. कहा कि इसके बिना जीवन मृत समान है.
भगवान महावीर का जीवन मानव कल्याण और नैतिक उत्थान का प्रतीक
डॉ शिवा नंद झा ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन मानव कल्याण और नैतिक उत्थान का प्रतीक है. उनकी शिक्षाएं केवल एक युग विशेष के लिए नहीं, अपितु सर्वकालिक हैं. मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. मंजू राय ने कहा कि महावीर का जीवन त्याग और करुणा का प्रतिमूर्ति है, जो अपने आदर्शतम रूप में आज भी प्रासंगिक है. स्वागत डॉ प्रियंका राय, धन्यवाद ज्ञापन डॉ संजीव कुमार शाह ने किया.
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