Darbhanga News: क्षीर सागर मंथन में मिले भगवान अनंत

Published by : PRABHAT KUMAR Updated At : 06 Sep 2025 10:25 PM

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Darbhanga News:हनुमान मंदिर के चबूतरे पर पूजा की चौकी सजी थी. फूल-बेल पत्र, अक्षत, चंदन आदि सजे थे. धूप-अगरबत्ती से वातावरण सुवासित हो रहा था.

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Darbhanga News: दरभंगा. संकटमोचन धाम में हनुमान मंदिर के चबूतरे पर पूजा की चौकी सजी थी. फूल-बेल पत्र, अक्षत, चंदन आदि सजे थे. धूप-अगरबत्ती से वातावरण सुवासित हो रहा था. चौकी के चारों तरफ दर्जनों पूजा की थाल सजे थे, जिसमें नये अनंत के साथ फूल-फल आदि रखे थे. गाय के दूध से भरे पात्र में पूजक क्षीर सागर का मंथन कर रहे थे. बार-बार पुरोहित उनसे इस बावत प्रश्न कर रहे थे. प्रत्येक बार पूजक इसका जवाब देते हुए कह रहे थे, कि हम क्षीर सागर का मंथन कर रहे हैं. इसमें भगवान अनंत को ढूंढ रहे हैं और भगवान अनंत मिल गये. प्रश्न था- की मथै छी? जवाब था- क्षीर सागर. प्रश्न था- किनका तकै छी? जवाब था- भगवान अनंत केँ. भेटला?, जवाब मिल रहा था- हँ भेटला. यह सुनते ही वहां मौजूद श्रद्धालु भगवान के आशीर्वाद के लिए नत मस्तक हो गये. यह नजारा था भगवान अनंत के पूजन का. भाद्र शुक्ल चतुदर्शी पर शनिवार को भगवान अनंत की पूजा को लेकर यह दृश्य प्राय: सभी पूजन स्थलों पर दिख रहा था. सुबह लोगों ने पवित्र जल से स्नान किया. वर्षभर से धारण कर रखे पुराने अनंत उतारे. उसे पूजा की थाल में रखा. घर के सभी सदस्यों के लिए नया अनंत डाला. फल-फूल, मिठाई, अक्षत, चंदन आदि लेकर पूजन स्थल पर पहुंचे. वहां पहले पुराने अनंत की पूजा की गयी. विधि-विधानपूर्वक पूजन के पश्चात पूजक ने क्षीर सागर मंथन आरंभ किया. नये अनंत से मंथन के पश्चात भगवान अनंत की कथा हुई. कथा संपन्न होने के बाद आरती हुई, तत्पश्चात पूजन संपन्न हुआ. श्रद्धालुओं ने पहले नया अनंत धारण किये. इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर भोजन किया. पुरुषों ने दाहिने बांह व महिलाओं ने अपनी बायीं बांह पर अनंत बांधा. मान्यता है कि अनंत बांधकर रखने वालों पर भगवान का आशीर्वाद सदैव बना रहता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु साल भर अनंत रखते हैं, वहीं कुछ लोग 14 दिनों के बाद विधिवत उसे विसर्जित कर देते हैं. अधिकांश श्रद्धालुओं ने अपने घर में पूजा की. मंदिरों पर भी पूजन हुआ, जिसमें आस-पास के लोग सम्मिलित हुए. भगवान के जयकारे से वातावरण गूंजता रहा.

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