Darbhanga News: मिथिला विवि में होगी साइबर फॉरेंसिक, मोबाइल फॉरेंसिक, बैलिस्टिक्स, डीएनए विश्लेषण की पढ़ाई

Edited by PRABHAT KUMAR
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Darbhanga News:ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में साइबर फॉरेंसिक, मोबाइल फॉरेंसिक, बैलिस्टिक्स, डीएनए विश्लेषण की पढ़ाई शुरू होगी.

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Darbhanga News: दरभंगा. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में साइबर फॉरेंसिक, मोबाइल फॉरेंसिक, बैलिस्टिक्स, डीएनए विश्लेषण की पढ़ाई शुरू होगी. विश्वविद्यालय ने इन विषयों में डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाने का निर्णय लिया है. विषय विशेषज्ञों के साथ बैठक एवं कार्यशाला में इन पाठ्यक्रमों के संचालन को लेकर बुधवार को विस्तार से विचार किया गया. विषय विशेषज्ञों ने पाया कि मिथिला विश्वविद्यालय का परिसर तथा यहां का शैक्षिक वातावरण इन पाठ्यक्रमों के संचालन के लिये पूरी तरह से उपयुक्त है.

अनलॉकिंग दि फ्यूचर: फिजिबिलिटी ऑफ फॉरेंसिक साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च” विषय हुआ मंथनकुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के एडवांस्ड रिसर्च सेंटर एवं आइक्यूएसी प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में “अनलॉकिंग दि फ्यूचर: फिजिबिलिटी ऑफ फॉरेंसिक साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च” विषय पर कार्यशाला हुई. विश्वविद्यालय के जन्तुविज्ञान विभाग के सम्मेलन हॉल में आयोजित कार्यशाला में संबंधित विषय के स्वरूप एवं शिक्षण संस्थान में क्रियान्वयन के पक्षों पर मंथन किया गया. कार्यशाला में गुजरात के पूर्व डीजीपी डॉ केशव कुमार, फोरेंसिक गुरु फरीदाबाद के सीइओ समीर दत्त, एनएसआइटी के वाइस प्रेसिडेंट धर्मेश भाई वंद्रा और शेरलॉक इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस के सीइओ रंजीत सिंह ने विषय विशेषज्ञ के तौर पर भाग लिया. विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण और संरचनात्मक परिसर को फॉरेंसिक विज्ञान शिक्षा के लिए उपयुक्त बताया. कार्यशाला ने छात्र स्टार्टअप, नवाचार नीति, मॉलिक्युलर जीव विज्ञान और डिजिटल फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की शुरुआत के माध्यम से फॉरेंसिक विज्ञान और शिक्षा में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना पर जोर दिया गया. परामर्श, साइबर सुरक्षा प्रावधान, दस्तावेज सत्यापन, डेटा पुनः प्राप्ति, ड्रोन फॉरेंसिक, ग्रामीण फॉरेंसिक आदि के माध्यम से राजस्व सृजन की संभावनाओं पर विषय विशेषज्ञों ने विचार रखा.

नयी शिक्षा नीति के तहत इन पाठ्यक्रमों का होगा संचालन

विश्वविद्यालय द्वारा नयी शिक्षा नीति 2020 के अनुसार संरेखित बहुविषयक और अंतः विषय कौशल आधारित डिप्लोमा पाठ्यक्रमों जैसे – साइबर फॉरेंसिक, मोबाइल फॉरेंसिक, बैलिस्टिक्स, डीएनए विश्लेषण आदि विषय की पढ़ाई शुरू करने की योजना पर विचार किया गया. विश्वविद्यालय ने विशेषज्ञों के साथ किये गये विमर्श के आधार पर इन पाठ्यक्रमों के संचालन पर मुहर लगा दी. विषय विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) द्वारा अनुमोदित अल्पकालिक व्यावसायिक प्रशिक्षण और राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण परिषद से प्रमाणन शुरू करने में विश्वविद्यालय की सहायता करने का आश्वासन भी दिया.

युवा प्रोफेसर और शोधार्थियों दें सक्रिय भागीदारी- कुलपति

कुलपति ने विशेषज्ञों के आउटसोर्सिंग की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे स्थाई कर्मियों और शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा सके. युवा प्रोफेसर और शोधार्थियों से फॉरेंसिक प्रयोगशाला की स्थापना की योजना बनाने और सीडीएफडी, हैदराबाद सरीखे प्रमुख संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन की योजना में सक्रिय भागीदारी करने को कहा. धन्यवाद ज्ञापन विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. दिलीप चौधरी व संचालन डॉ सुशोवन बनिक ने किया. कार्यक्रम में वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. हरेकृष्ण सिंह, आइक्यूएसी निदेशक डॉ ज्या हैदर, एआरसी निदेशक डॉ नौशाद आलम आदि शामिल थे.

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