विलंब से मिलने वाले प्रथम एसीपी का असर दूसरे-तीसरे एमएसीपी पर भी पड़ेगा, वित्त विभाग ने उदाहरण देकर किया स्पष्ट

Author Minu gupta|Edited by Prabhat kumar
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विलंबित एसीपी का असर: दूसरे-तीसरे एमएसीपी पर भी पड़ेगा,...

सांकेतिक तस्वीर

बिहार वित्त विभाग ने एसीपी और एमएसीपी को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। जानें प्रथम एसीपी में देरी होने पर दूसरे और तीसरे एमएसीपी पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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दरभंगा. बिहार सरकार के वित्त विभाग ने राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों के एसीपी एवं एमएसीपी से संबंधित महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को एसीपी नियमावली, 2003 की कंडिका 4(5)(ii) के तहत अनुशासनिक कार्रवाई, विभागीय कार्यवाही अथवा पदोन्नति के लिए अयोग्य पाए जाने के कारण प्रथम वित्तीय उन्नयन (एसीपी) 12 वर्ष पूरा होने पर समय से नहीं मिलकर विलंब से मिलता है, तो इसका प्रभाव दूसरे एवं तीसरे वित्तीय उन्नयन (एमएसीपी) पर भी पड़ेगा. वित्त विभाग ने पत्र में कहा है कि एमएसीपी नियमावली, 2025 के प्रावधानों के अनुसार विलंबित प्रथम एसीपी की स्थिति में बाद का वित्तीय उन्नयन भी उसी अनुपात में आगे खिसक जाएगा. विभाग ने पूर्व में जारी विभिन्न स्पष्टीकरणों का हवाला देते हुए इस संबंध में व्याप्त भ्रम को दूर किया है. उदाहरण से समझें यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति 5 सितंबर 1994 को हुई थी, तो सामान्य स्थिति में उसे 12 वर्ष बाद 5 सितंबर 2006 से प्रथम एसीपी मिलना चाहिए था. लेकिन यदि किसी कारणवश प्रथम एसीपी विलंब से 5 सितंबर 2007 को स्वीकृत हुआ, तो दूसरे वित्तीय उन्नयन की गणना भी उसी विलंबित तिथि से होगी. इसी प्रकार तीसरे एमएसीपी की तिथि भी आगे बढ़ जाएगी. यानी प्रथम वित्तीय उन्नयन में जितनी देरी होगी, उतनी ही देरी आगे के वित्तीय उन्नयन पर भी लागू होगी. वित्त विभाग ने सभी विभागों, प्रमंडलीय आयुक्तों एवं जिलाधिकारियों को इस स्पष्टीकरण के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

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