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भटकाव और यात्राओं से भरा होता है महापुरुषों का जीवन

महापंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर पीजी हिंदी विभाग एवं दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में वनस्पति विज्ञान विभाग के सभागार में ‘राहुल सांकृत्यायन का जीवन-दर्शन’ विषयक संगोष्ठी हुई.

दरभंगा. महापंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर पीजी हिंदी विभाग एवं दर्शनशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में वनस्पति विज्ञान विभाग के सभागार में ‘राहुल सांकृत्यायन का जीवन-दर्शन’ विषयक संगोष्ठी हुई. अध्यक्षता मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. एके बच्चन ने की. मौके पर पत्रिका ‘किसलय’ का लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम का आरंभ खुशबू कुमारी, निशा, बेबी के स्वागत गीत से हुई. मुख्य अतिथि प्रो. प्रभाकर पाठक ने कहा कि महापुरुषों का जीवन भटकाव और यात्राओं से भरा होता है. तब ही वे अपने पथ निर्मित कर पाते हैं. अप्रैल से जून तक हिंदी साहित्य में यात्री ही पैदा हुए. अप्रैल में महायात्री राहुल सांकृत्यायन, मई में लोकयात्री देवेंद्र सत्यार्थी और जून में नागार्जुन ‘यात्री’. कहा कि राहुल अपनी कल्पनाशीलता में भी ऑब्जेक्टिव थे. ‘22 वीं शताब्दी’ नामक पुस्तक में विश्व राष्ट्रवाद की, विश्व भाषा की वे कल्पना करते हैं. स्त्री- मुक्ति के लिए सामाजिक बंधनों पर अपनी रचना ‘वोल्गा से गंगा’ में अनेक प्रहार किए. ‘निशा’ कहानी तो स्त्री विमर्श की पूर्व पीठिका के योग्य मानी जाने वाली कृति है. राहुल के लेखन में वर्ग एवं शोषण विहीन समाज की स्थापना का संकल्प- प्रो. चंद्रभानु इससे पूर्व विषय प्रवेश कराते हुए पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि केदार पांडेय से राहुल सांकृत्यायन होने तक की यात्रा, एक विराट वैचारिक संघर्ष यात्रा है. उनके लेखन के क्षेत्र दर्शन, साहित्य, विज्ञान, राजनीति है. यद्यपि सबके मूल में वर्ग संघर्ष है. उनके समूचे लेखन में एक समतामूलक, वर्गविहीन, शोषण विहीन समाज की स्थापना का बौद्धिक संकल्प प्रकट होता है. राहुल ने दुनिया को अधिक मानवीय और सहिष्णु बनाया- प्रो. बच्चन मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. एके बच्चन ने कहा राहुल ने दुनिया को अधिक मानवीय और सहिष्णु बनाया. सतत जीवन यात्रा में उन्होंने नाम बदले, चोले बदले, लेकिन कोई भी बदलाव महज बदलाव के लिए नहीं हो कर आमूलचूल परिवर्तन की प्रबल आकांक्षा थी. दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. रुद्रकांत अमर ने राहुल के प्रारंभिक जीवन एवं उनके दांपत्य जीवन की चर्चा की. डॉ सुरेंद्र सुमन ने कहा कि सत्य की गवेषणा की जो बेचैनी बुद्ध में थी, वही राहुल में भी थी. राहुल की रचनाएं आज भी प्रासंगिक- प्रो. उमेश इससे पूर्व स्वागत करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि राहुल की रचनाएं आज भी प्रासंगिक है, तो उसका कारण उनकी निरंतर गतिशील उन्नत, प्रगतिशील वैचारिकी है. डॉ आनंद प्रकाश गुप्ता के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. सविता वर्मा, प्रो. मुनेश्वर यादव, डॉ घनश्याम राय, डॉ एमपी वर्मा, डॉ मनोज कुमार, डॉ प्रियंका, डॉ सुनीता, डॉ मंजरी खरे ने भी विचार रखा. राहुल सांकृत्यायन की जयंती के उपलक्ष्य में हिंदी विभाग द्वारा आयोजित निबंध प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान पाने वाले छात्र दर्शन सुधाकर, विक्रम कुमार, विनिता कुमारी तथा दीपक कुमार के नामों की घोषणा की गई. कार्यक्रम में नागार्जुन चेयर के संयोजक डॉ ज्वालाचंद्र चौधरी आदि की उपस्थिति रही. धन्यवाद ज्ञापन डॉ संजीव कुमार शाह ने किया.

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