बागमती तटबंध परियोजना के खिलाफ फिर तेज हुआ विरोध, अध्ययन समिति गठित करने का फैसला

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बैठक में शामिल चास वास बचाओ अभियान और तालाब बचाओ अभियान के सदस्य.

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बागमती तटबंध परियोजना को लेकर किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का विरोध फिर से तेज हो गया है. संयुक्त बैठक में परियोजना के प्रभावों का समग्र अध्ययन कराने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है. यह समिति 15 अगस्त के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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Bagmati Embankment Project: बागमती तटबंध परियोजना को लेकर किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का विरोध एक बार फिर तेज होने लगा है. चास वास बचाओ अभियान और तालाब बचाओ अभियान की संयुक्त बैठक में आरोप लगाया गया कि रिव्यू कमेटी के अध्ययन और निर्णय के बिना सरकार बागमती तटबंध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए फिर सक्रिय हो गयी है. बैठक में परियोजना के प्रभावों का समग्र अध्ययन कराने के लिए विशेषज्ञों की एक अध्ययन समिति गठित करने का निर्णय लिया गया.

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2017 में बनी थी नौ सदस्यीय रिव्यू कमेटी

शहर के दिग्घी पश्चिमी मोहल्ला में आयोजित बैठक में चास वास बचाओ अभियान के संयोजक जितेंद्र यादव ने कहा कि बागमती तटबंध परियोजना का दरभंगा और मुजफ्फरपुर के हजारों किसान वर्ष 2011 से विरोध कर रहे हैं. उनका कहना था कि परियोजना के संभावित प्रभावों को लेकर किसानों की चिंताओं को गंभीरता से समझने की जरूरत है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर बागमती तटबंध परियोजना के रिव्यू के लिए नौ सदस्यीय कमेटी गठित की गयी थी. इसमें किसानों की ओर से नदी विशेषज्ञ दिनेश कुमार मिश्र, आइआइटी कानपुर के अर्थ विभाग के प्रो. राजीव सिन्हा, एनआइटी पटना के नदी विशेषज्ञ प्रो. रमाकार झा और पर्यावरण कार्यकर्ता अनिल प्रकाश को शामिल किया गया था.

जितेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि रिव्यू कमेटी की शुरुआत में एक बैठक हुई, लेकिन इसके बाद अब तक दोबारा बैठक नहीं हुई. इसके बावजूद सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय है.

परियोजना के प्रभाव का समग्र अध्ययन जरूरी

बैठक में नवल किशोर सिंह ने कहा कि किसान बांध निर्माण के विरोध के बजाय पहले इसके प्रभाव का समग्र अध्ययन चाहते हैं. उन्होंने कहा कि तटबंध बनने से खेती-किसानी, पर्यावरण और स्थानीय परिस्थितियों पर पड़ने वाले प्रभाव की विस्तृत जानकारी सामने आनी चाहिए. इसके बाद ही परियोजना को लेकर कोई निर्णय लिया जाना चाहिए.

विशेषज्ञों की अध्ययन समिति बनेगी, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

बैठक में निर्णय लिया गया कि 15 अगस्त के बाद डॉ. विद्यानाथ झा की अध्यक्षता में अध्ययन समिति गठित की जाएगी. इसमें वनस्पति, पर्यावरण, भूगोल और कृषि विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा.

अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, समिति परियोजना के संभावित प्रभावों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी. इसी रिपोर्ट के आधार पर किसानों की ओर से पटना उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी की जाएगी.

बैठक में मुजफ्फरपुर से जितेंद्र यादव, नवल किशोर सिंह, राम लोचन सिंह, राज कुमार मंडल और विवेक कुमार तथा दरभंगा से डॉ. विद्यानाथ झा, तसीम नवाब और नारायण जी चौधरी शामिल हुए.

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