प्रतिपक्ष की भूमिका निभाता है साहित्य
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :15 May 2017 6:00 AM (IST)
विज्ञापन

कार्यक्रम. साहित्य अकादमी सम्मेलन का समापन दरभंगा : साहित्य अकादमी दिल्ली की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘उत्तर-पूर्व एवं उत्तरी लेखक सम्मेलन’ अंतिम दिन रविवार को प्रथम सत्र में ‘समकालीन साहित्य की प्रवृत्तियां’ विषय पर विमर्श हुआ. लनामिवि के वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चर्चित लेखक रामवचन राय ने […]
विज्ञापन
कार्यक्रम. साहित्य अकादमी सम्मेलन का समापन
दरभंगा : साहित्य अकादमी दिल्ली की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘उत्तर-पूर्व एवं उत्तरी लेखक सम्मेलन’ अंतिम दिन रविवार को प्रथम सत्र में ‘समकालीन साहित्य की प्रवृत्तियां’ विषय पर विमर्श हुआ. लनामिवि के वाणिज्य एवं प्रबंधन विभाग में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चर्चित लेखक रामवचन राय ने कहा कि साहित्य में एक ही समय कई प्रवृत्तियां आती हैं. समाज की जीवन-धारा साहित्य को प्रभावित करती है. साहित्यकार समय की धड़कन समझते हैं. वह भोक्ता होते हैं. समाज की चीजों को आत्मसात करते हैं,
उसे पचाते हैं, जो अनुभव का अंग बन जाता है. यही कविता, कथा, उपन्यास आदि साहित्यिक विधाओं के रूप में सामने आता है. समय के हिसाब से ही जीवन पद्धतियां होती हैं. कला व साहित्य के समक्ष बड़ी चुनौतियां हैं. साहित्य की भूमिका सदा प्रतिपक्ष की रही है. इस रूप में यह वर्तमान का विश्लेषण करती है. आज साहित्य की प्रमुख प्रवृत्ति दलित विमर्श, स्त्री विमर्श, संघर्ष, भूख, गरीबी आदि के रूप में उभरी है.
इस सत्र में गुवाहाटी से आईं रीतामणि वैश्य ने पूर्वोत्तर की भाषाओं की प्रवृतियों पर विचार रखा. कहा कि पूर्वोत्तर में लगभग 150 भाषाएं और बोलियां हैं. इनमें बहुत सारी भाषाएं अलिखित हैं.
कई भाषाएं अपनी लिपि नहीं होने की वजह से दूसरी लिपि में लिखी जा रही है. यह लेखन-समस्याओं का कारण भी बन रही है. उन्होंने असम, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के विभिन्न भाषाओं में हो रहे लेखन के विषय-वस्तु को रखते हुए उनकी प्रवृत्तियों का रेखांकन किया. कमल मोहन चुन्नू ने भारत और नेपाल के मिथिला क्षेत्र में रचे जा रहे मैथिली साहित्य की प्रवृतियों को विस्तार से रखा. कविता, कथा, उपन्यास, नाटक आदि में दलित विमर्श,
स्त्री विमर्श, विक्षोभ, लोकपाल, आरक्षण, विद्रूप शहरीकरण सहित मैथिली में लेखन की तमाम प्रवृतियों को सामने रखकर विचार किया. अब्दुल मन्नान तरजी ने लंबी ग़ज़ल रचना के माध्यम से अपने विचार रखे. उन्होंने एक ही ग़ज़ल में जीवन के सभी पहलू को उपस्थित कर श्रोताओं का दिल जीत लिया. कार्यक्रम का समापन अतिथि साहित्यकारों का पाग-चादर से अभिनंदन तथा विदा-गीत समदाउन के साथ हुआ.
सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार: दरभंगा. ‘अपना क्या है इस जीवन में सब तो लिया उधार, सारा लोहा उन लोगों का अपनी केवल धार’, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कवि अरुण कमल ने जब अपनी कविता की इन पंक्तियों को रखा तो पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. उन्होंने ‘धार’ शीर्षक की अपनी इस कविता के माध्यम से संदेश दिया कि व्यक्ति के निर्माण में पूरे समाज और परिवार की महती भूमिका होती है. असलीहत में उसका अपना कुछ भी नहीं होता. वे कविता पाठ सत्र में अध्यक्षीय काव्य पाठ कर रहे थे.
उन्होंने ‘घोषणा’ शीर्षक कविता भी पढ़ी जो काफी सराही गई. इस सत्र में कासिंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ देवनारायण झा ने अपनी संस्कृत रचना में सहृदय कवि-साहित्यकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को केंद्र में रखकर राष्ट्र की गाथा कही.
वहीं राजस्थानी के कवि मीठेश निर्मोही ने ‘दादी’, ‘बुरे संस्कार’ एवं ‘दीवार’ शीर्षक कविता का पाठ किया. बंटवारे के कारण घरों में खड़ी होती दीवारें अपने नीचे संवेदनाओं व संबंधों को भी दफन कर लेती हैं, इसका उन्होंने बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया. मैथिली के अजित कुमार आजाद ने ‘जिद’, ‘कहुना तऽ बचाउ’ और ‘विसर्जित होयबासँ पहिने’ शीर्षक कविता के माध्यम से जीवन के कई पहलुओं को रेखांकित किया. मणिपुरी के कोनसम दोनेश्वर, बंगला के विद्युत पाल,
हिंदी के अमिताभ व असमिया के अनुपम कुमार ने भी काव्य-पाठ किया. बोडो की सुनीति नर्जारी ने ‘प्रभाती मित्र’ शीर्षक में प्रकृति का मनोहारी चित्र उकेरा. संताली के टुड़ा मुर्मू सिंचादो ने मातृभाषा दिवस पर धरती व मां की तुलना करती अपनी कविता ‘धर्म की मां’ के माध्यम से आयोजन को सामयिक बना दिया. कवियों ने विविध भाव-भूमि की अपनी रचनाओं से वातावरण को काव्यमय बनाने में सफलता पाई. मूल भाषा और उसके अनुवाद का पाठ किये जाने से कविताएं श्रोताओं तक पहुंचने में सफलता पाई और सभी ने जमकर इसका लुत्फ उठाया.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




