श्रद्धा व विश्वास के बल पर वश में हो जाते हैं भगवान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Feb 2017 4:06 AM (IST)
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बलभद्रपुर में चल रहे श्रीमद् शिव महापुराण कथा का तीसरा दिन दरभंगा : लहेरियासराय ब्रह्मस्थान बलभद्रपुर में चल रहे श्रीमद् शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन जानकी शरण बाल व्यास ने सती मां के जन्म व बाल लीला का वर्णन किया. उन्होंने कहा कि भगवान शिव आत्मा हैं तो सती मां बुद्धि. तर्क-वितर्क करना बुद्धि […]
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बलभद्रपुर में चल रहे श्रीमद् शिव महापुराण कथा का तीसरा दिन
दरभंगा : लहेरियासराय ब्रह्मस्थान बलभद्रपुर में चल रहे श्रीमद् शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन जानकी शरण बाल व्यास ने सती मां के जन्म व बाल लीला का वर्णन किया. उन्होंने कहा कि भगवान शिव आत्मा हैं तो सती मां बुद्धि. तर्क-वितर्क करना बुद्धि का स्वभाव है, जिसके कारण बुद्धि खंडित हो जाती है. शिव का ज्ञान अखंड है. शिव-सती का विवाह तो हो गया, परंतु वंश विस्तार नहीं हुआ, क्योंकि आत्मा व बुद्धि में प्रेम का अभाव था.
वहीं बुद्धि सती जब पार्वती के रूप में हिमालय के घर प्रगट हुई तो आनंद व प्रेम का सागर उमड़ गया. भगवान शिव व पार्वती के श्रद्धा व विश्वास से कार्तिकेय भगवान प्रगट हुए, जिन्होंने तारकासुर का संहार किया. श्रद्धा व विश्वास जीवन का आधार है, जिसके सहारे भक्त भगवान को अपने वश में करते हैं.
श्रद्धा कभी भी अंधी नहीं होनी चाहिए. विश्वास अजन्मा होता है. शिवजी अजन्मा हैं. आत्म शिव में रमण करना ही भगवान शिव की सच्ची पूजा है. यह न कभी मरती है न कभी जन्म लेती है. कथा के आरंभ में राजेश कुमार सिंह व ब्रह्मस्थान के पुजारी ने बाल व्यास का माल्यार्पण कर स्वागत किया.
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