सकरी-हसनपुर रेलखंड के निर्माण को मिलेगी गति
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Feb 2017 6:22 AM (IST)
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बढ़ेगी सुविधा. बजट में किया गया 50 करोड़ का प्रावधान दरभंगा : बहुप्रतीक्षित सकरी-हसनपुर रेल खंड के निर्माण के प्रति रेलवे गंभीर हुआ है. इस बार बजट में इस खंड के लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वहीं खगड़िया से कुशेश्वरस्थान के बीच नयी लाइन बिछाने के काम की रफ्तार तेज होगी. इसके […]
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बढ़ेगी सुविधा. बजट में किया गया 50 करोड़ का प्रावधान
दरभंगा : बहुप्रतीक्षित सकरी-हसनपुर रेल खंड के निर्माण के प्रति रेलवे गंभीर हुआ है. इस बार बजट में इस खंड के लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वहीं खगड़िया से कुशेश्वरस्थान के बीच नयी लाइन बिछाने के काम की रफ्तार तेज होगी. इसके लिए विभाग ने 30 करोड़ दिये हैं. यहां यह स्पष्ट कर दें कि खगड़िया-कुशेश्वरस्थान मूल रूप से सकरी-हसनपुर रेल खंड का हिस्सा है. इस तरह अगर समेकित रूप से देखें तो इस खंड को रेलवे ने प्राथमिकता की सूची में रखा है.
कुल मिलाकर इस खंड के लिए इस बजट में 80 करोड़ का प्रावधान किया है. इस खंड के तैयार हो जाने से क्षेत्र के यात्रियों को काफी लाभ होगा. वैसे होगा क्या यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन बजट में राशि के प्रावधान व परियोजनाओं के प्रति रेलवे बोर्ड की संजीदगी को देखते हुए इस खंड को इस साल फाइनल टच मिलने के आसार हैं.
आठ साल से अधर में रेलखंड
इसी बीच चुनाव सिर पर देख आनन-फानन में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद ने साल 2008 के 5 दिसंबर को अधूरे रेलखंड पर परिचालन को हरी झंडी दिखा दी. लिहाजा ट्रेनों का परिचालन आरंभ हो गया. किस स्थिति में इसका उद्घाटन किया गया, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि न तो एक भी स्टेशन भवन बना था और न ही टिकट काउंटरों की ही व्यवस्था की गयी थी. बस, परिचालन चालू कर वाहवाही लूटने की कोशिश की गयी. इसका खामियाजा आज भी क्षेत्रवासी भुगतने के लिए मजबूर हैं. सकरी से बिरौल के बीच आज तक एक भी फाटक चालू नहीं किया गया है. सभी फाटक मानव रहित ही हैं, जो आये दिन हादसे की वजह बन रहे हैं.
रेलवे बना है लापरवाह
इस खंड के प्रति रेल महकमा पूरी तरह लापरवाह है. एक तो पक्षी अभ्यारण्य की वजह से सकरी से हसनपुर तक रेल खंड का निर्माण खटाई में पड़ा है, लेकिन जितना विभाग के हाथ में है, उसमें भी वह लापरवाही बरत रहा है. मालूम रहे कि बिरौल से आठ किमी आगे हरिनगर तक पटरी बिछाये जाने का काम पूरा कर लिया गया है. वर्ष 2013 से ही सीआरएस इंस्पेक्शन की प्रतीक्षा हो रही है. ज्ञातव्य हो कि सीआरएस निरीक्षण के बाद फिट सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही किसी खंड पर परिचालन बहाल होता है. लिहाजा इस खंड पर सीआरएस का इंतजार हो रहा है. कम से कम हरिनगर तक के यात्रियों को सुविधा तो मिलती. वैसे विभागीय सूत्र बताते हैं कि मार्च 2017 तक इसका उद्घाटन हो जाने के आसार हैं. विभाग ने इसे प्राथमिकता में रखा है.
रेलवे ने प्राथमिकता की सूची में डाला, दिये 30 करोड़ रुपये
42 साल पहले मिली स्वीकृति
इस खंड का सपना कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ललित नारायण मिश्र ने संजोया था. करीब 42 साल पहले उन्होंने बतौर रेल मंत्री इसकी स्वीकृति वर्ष 1974 में दिलायी. दुर्भाग्य से अगले ही साल यानी 1975 में एक समारोह के दौरान समस्तीपुर जंकशन पर बमबारी में उनकी मौत हो गयी. उनके साथ ही यह महत्वाकांक्षी परियोजना गुमनामी के अंधेरे में डूब गयी. इसे चिरनिद्रा से वर्ष 1996 में तत्कालीन रेल मंत्री राम विलास पासवान ने जगाया. उन्होंने इसका विधिवत शिलान्यास किया. इसके बाद कार्यारंभ हुआ. आश्चर्यजनक पहलू यह है कि 42 वसंत बीतने के बाद भी यह पूरी तौर पर धरातल पर नहीं उतर सका है.
परियाेजना को धरातल पर उतारने की कवायद
79 किमी लंबे इस खंड के निर्माण का नवीनतम लागत 325 करोड़ आंकी गयी. इसमें से समाप्त हो रहे चालू वित्तीय वर्ष के बजट में रेलवे ने 5 करोड़ दिये थे. 90 करोड़ इसमें शेष रह गये थे. इसमें से रेलवे ने इस परियोजना के लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया है. इससे इस परियोजना को फाइनल टच मिलने के आसार बढ़ गये हैं.
बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के लोगों को मिलेगी सुविधा
इस खंड के चालू होने से बाढ़ ग्रस्त इस क्षेत्र के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. उल्लेखनीय है कि आज भी इस इलाके में सालों भर लोगों के आवागमन का साधन नाव ही है. ऐसे में सड़क मार्ग की कल्पना बेमानी ही होगी. वैसे दरभंगा मुख्यालय से निकट खगड़िया, सहरसा आदि है. उस क्षेत्र से इस इलाके का रोटी-बेटी का संबंध भी है. लिहाजा रेल सेवा बहाल हो जाने से इसके और प्रगाढ़ होने की पूरी संभावना है.
खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेलखंड
के निर्माण के िलए 30 करोड़
बताया जाता है कि पूर्व मध्य रेल ने खगड़िया से कुशेश्वरस्थान तक बिछनेवाली रेल लाइन के लिए नये बजट में मिली राशि में से 30 करोड़ का प्रावधान किया है. 550 करोड़ की समेकित परियोजना में से अधिकांश राशि पहले ही मिल चुकी है. उम्मीद जतायी जा रही है कि इस साल के अंत तक इसे मूर्त रूप दिया जा सकता है.
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