अमीन की कमी से बढ़ रहा भूमि विवाद जरूरत. जिले में कार्यरत हैं सिर्फ छह अमीन

Published at :16 Jan 2017 5:08 AM (IST)
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अमीन की कमी से बढ़ रहा भूमि विवाद जरूरत. जिले में कार्यरत हैं सिर्फ छह अमीन

दरभंगा : जिले में अमीनों की भारी कमी है. इसका असर विशेषकर विवादित जमीनों की मापी पर पड़ रहा है. जमीनी विवाद के अधिकांश मामले मापी नहीं होने के कारण सालों से लंबित है. इसे लेकर प्रतिदिन कहीं न कहीं विवाद होता रहता है. जिले में अभी मात्र छह सरकारी अमीन हैं. जबकि 72 की […]

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दरभंगा : जिले में अमीनों की भारी कमी है. इसका असर विशेषकर विवादित जमीनों की मापी पर पड़ रहा है. जमीनी विवाद के अधिकांश मामले मापी नहीं होने के कारण सालों से लंबित है. इसे लेकर प्रतिदिन कहीं न कहीं विवाद होता रहता है. जिले में अभी मात्र छह सरकारी अमीन हैं. जबकि 72 की जरूरत बतायी जा रही है.

जिला प्रशासन ने 66 पदों पर नियुक्ति को ले प्रदेश मुख्यालय को सूची भेज रखी है.

एक अमीन के जिम्मे चार अंचल का भार : वर्तमान में एक-एक अमीन के सिर पर चार से ज्यादा अंचल का भार है. अधिक कार्यभार होने के कारण अमीन हर मामले के लिए समय नहीं निकाल पा रहे. इसका नतीजा यह हो रहा कि भूमि विवाद का मामला बढता ही जा रहा है.
भूमि विवाद के मामले का निबटारा नहीं : विवादित जमीनों की मापी नहीं होने के कारण लोक शिकायत अधिनियम भी इन मामले में बेकार सावित हो रहा है. अमीनों की कमी के कारण लोक शिकायत में आये भूमि विवाद के अधिकांश मामले का निपटारा सीओ नहीं कर पा रहे.
लटका हुआ है नियुक्ति का मामला
कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अमीनों की नियुक्ति को लेकर पूर्व में परीक्षा ली गयी था. उसका परिणाम भी जारी कर दिया गया. परंतु अधिकांश सफल परीक्षार्थियों के कागजात दुरुस्त नहीं रहने के कारण मामला लटका बताया जा रहा है.
72 अमीनों की बतायी जा रही जरूरत
इन विभागों को
चाहिए अमीन
जिले में जब 12 अंचल का हुआ करता था, तब प्रत्येक अंचल में एक अमीन का स्वीकृत पद था. साल 2000 में जिले में छह प्रखंडों की बढोतरी हुई. दूसरी तरफ पहले जहां भूमि सुधार विभाग में अमीन की नियुक्ति नहीं होती थी वहां भी अब अमीन की जरूरत महसूस की जा रही है. भू-अर्जन में तो पूर्व से ही अमीन का स्वीकृत पद है, परन्तु कार्य बढ़ने से अमीन की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है.
पैसा जमा करने पर भी नहीं मिल रही सेवा
भूमि विवाद में सरकारी अमीन से जमीन की मापी कराने की अनिवार्यता है. अमीन के फीस के नाम पर अंचल कार्यालय में लोग निर्धारित फीस जमा तो करा देते हैं पर इंतजार के अलावा कुछ नहीं मिलता. सरकारी अमीन को फूर्सत नहीं होने के कारण कुछ लोग सीओ के इशारे पर निजी अमीन से मापी करा लेते हैं. लेकिन संतुष्टि नहीं मिलने के कारण मामला फंसा रह जाता है.
अंचलों से अमीन मंगवाकर भूमि सुधार विभाग एवं राजस्व तथा भू-अर्जन विभाग में काम लिया जाता है. एक अमीन के पास चार अंचल का प्रभार होने के कारण परेशानी आ रही है. 66 अमीनों की रिक्ति सूची मुख्यालय को भेजी गई है. जल्द ही अनुमोदन की उम्मीद है.
रमेशचंद्र चौधरी, प्रशाखा पदाधिकारी
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