नशा मुक्ति केंद्र में बढ़ रही मरीजों की संख्या

Published at :04 Jan 2017 5:09 AM (IST)
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नशा मुक्ति केंद्र में बढ़ रही मरीजों की संख्या

शराबबंदी का असर Â गांजा, भांग व व्हाइटनर का शिकार हो रही युवा पीढ़ी, नशा मुक्ति केंद्र में नौ मरीज भरती दरभंगा : शराबबंदी के बाद नशे के शिकार लोगों के परिवार में जहां एक ओर खुशियां लौटने लगी है, वहीं दूसरी ओर इसका साइड इफेक्ट भी दिखने लगा है. शराब के आदी लोग शराब […]

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शराबबंदी का असर Â गांजा, भांग व व्हाइटनर का शिकार हो रही युवा पीढ़ी, नशा मुक्ति केंद्र में नौ मरीज भरती

दरभंगा : शराबबंदी के बाद नशे के शिकार लोगों के परिवार में जहां एक ओर खुशियां लौटने लगी है, वहीं दूसरी ओर इसका साइड इफेक्ट भी दिखने लगा है. शराब के आदी लोग शराब नहीं मिलने के बाद भांग, गांजा, व्हाइटनर आदि का सेवन करने लगे हैं. काफी संख्या में युवा पीढ़ी इसके शिकार हो बीमार हो रहे हैं. नशा मुक्ति केंद्र में नशे के शिकार नौ युवकों का इलाज चल रहा है. नशे के शिकार अधिकांश युवकों ने बताया कि शराबबंदी के बाद कुछ दिनों तक तो अधिक कीमत पर शराब खरीदकर सेवन किया.
लेकिन, पैसे के अभाव में नशा के लिये भांग, गांजा और व्हाइटनर का इस्तेमाल करने लगा. इसके इस्तेमाल से उनका शरीर कमजोर हो गया तथा शरीर में कंपकंपी होने लगी. बीमार होने के बाद परिजनों ने नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती करा दिया. यहां वे लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं. इलाज करा रहे अधिकांश युवक अब नशा को हाथ नहीं लगाने की कसमें खा रहे थे. वहीं कुछ युवक नशे के लिये हर वक्त भागने के प्रयास में रहते हैं.
समय से नाश्ता नहीं मिलने से परेशान हैं मरीज: नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती मरीजों को समय से नास्ता नहीं मिलने के कारण परेशानी हो रही है. उनलोगों को 11.30 बजे से पहले कभी भी नाश्ता नहीं मिलता है. इसके कारण सुबह की दवा 12 बजे के बाद दी जाती है. वहीं नाश्ता मिलने के एक घंटे बाद ही लंच व शाम पांच बजे रात का भोजन परोस दिया जाता है. इस संबंध में पूछने पर कर्मियों ने बताया कि मरीजों को बिना नाश्ता के दवा नहीं दी जा सकती है. इसलिये नास्ता मिलने के बाद ही मरीजों को दवा दी जाती है.
चाय व मैगजीन की सुविधा नहीं
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के आदेश के बाद भी नशा मुक्ति केन्द्र के मरीजों को सुबह व शाम में चाय व बिस्कुट नहीं दिया जाता है. लेकिन एक महीने चाय व बिस्कुट देने के बाद पिछले तीन महीने से चाय देना बंद कर दिया गया. मरीजों के लिये मैगजीन व समाचार पत्र भी उपलब्ध कराना था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा.
मरीजों को नई जिंदगी दे रहा नशा मुक्ति केन्द्र
नशे के शिकार लोगों को नशा मुक्ति केन्द्र नई जिंदगी दे रहा है. शराबबंदी के बाद यहां के आउटडोर में अबतक 244 मरीजों का इलाज हुआ है. वहीं 89 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया है. हालांकि, शुरूआती दौर में यहां दो मरीजों की मौत हुई. साथ ही दो मरीज भाग भी गये थे. केन्द्र में एक नोडल पदाधिकारी, तीन चिकित्सक, एक परामर्शी, दो नर्स, तीन चतुर्थवर्गीय कर्मचारी, तीन वार्ड अटेडेंट व एक लिपिक प्रतिनियुक्त हैं.
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