\\\\टं३३ी१त्र/ू/रविलंब से बोयी जाने वाली गेहूं की बुआई करें खत्म

Published at :29 Dec 2015 9:45 PM (IST)
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\\\\टं३३ी१त्र/ू/रविलंब से बोयी जाने वाली गेहूं की बुआई करें खत्म \\\\टं३३ी१त्र/र* क्यारी में तैयार प्याज के पौध की करें रोपाई दरभंगा : राजेन्द्र कृषि विश्वविद्याल के कृषि वैज्ञानिक ने किसानों के लिए जारी समसामयिक सुझाव में कहा है कि प्याज का पौध जो 50-55 दिनों का हो गया हो, तैयार क्यारी में पंक्ति से पंक्ति […]

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\\\\टं३३ी१त्र/ू/रविलंब से बोयी जाने वाली गेहूं की बुआई करें खत्म \\\\टं३३ी१त्र/र* क्यारी में तैयार प्याज के पौध की करें रोपाई दरभंगा : राजेन्द्र कृषि विश्वविद्याल के कृषि वैज्ञानिक ने किसानों के लिए जारी समसामयिक सुझाव में कहा है कि प्याज का पौध जो 50-55 दिनों का हो गया हो, तैयार क्यारी में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 15 सेमी0, पौध से पौध की दूरी 10 सेमी पर रोपाई करें. पौध की रोपाई अधिक गहराई में नहीं करें. विलम्ब से बोयी जाने वाली गेहूॅ की किस्मों की बुआई यथाशीघ्र समाप्त करें. गेहूं की फसल 20-25 दिनों का हो गयी हो तो उसममें हल्की सिंचाई अवश्य करें. सिंचाई के 2-3 दिनों बाद नेत्रजन उर्वरक की मात्रा डाले. गेहंू की फसल में खर-पतवार नियंत्रण की सबसे उपयुक्त अवस्था बुआई के 30 से 35 दिनों बाद होती है. गेहॅू में उगने वाले सभी प्रकार के खरपतवार के नियंत्रन के लिए पहली सिंचाई के बाद सल्फोसल्फचुरॉन 33 ग्राम प्रति हेक्टर एवं मेटसल्फयुरॉन 20 ग्राम प्रति हेक्टर दवा 500 लीटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल में छिड़काव करें. ध्यान रहे छिड़काव के वक्त खेत में प्रयाप्त नमी हो. रबी मक्का की फसल में निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई कर मिट्टी चढ़ा दें. मौसम वैज्ञानिक ने कहा है कि सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. आलू में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें.मशरूम की वृद्वि पर गिरते तापमान का कुप्रभाव पड़ सकता.उत्पादन गृह में तापक्रम 25 से 28 डिग्री सेल्सियस बनाये रखें. बैगन की फसल को तना एवं फल छेदक कीट से बचाव के लिए तना एवं फलो को इकठा कर नष्ट कर दें.यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड 48 इसी/ 1 मिली प्रति 4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. दूधारु पषुओं के रख-रखाव एवं खान पान पर विशेष ध्यान दें. दुधारु पशुओं के दूध में निम्न तापमान के कारण आयी कमी को दूर करने के लिए नियमित रुप से दाने के साथ कैल्सियम भी खिलायें. पशुओं को रात में खुले स्थानों पर नही रखें . बिछावन के लिए सुखी घास या राख का उपयोग करें.

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