सीसीटीवी में नहीं दिखा जालसाज का चेहरा

सीसीटीवी में नहीं दिखा जालसाज का चेहरा सही तरीके से हो जांच तो सामने आ सकता एक अपराधी यूटीएस काउंटर से जारी टिकट को किया था स्क्रेच टिकट खरीदनेवाले को चिन्हित कर दबोच सकती पुलिसदरभंगा. दरभंगा जंकशन पर टिकट बदलने वाले गिरोह के किसी भी सदस्य का चेहरा रेल प्रशासन के सामने नहीं आ सका. […]
सीसीटीवी में नहीं दिखा जालसाज का चेहरा सही तरीके से हो जांच तो सामने आ सकता एक अपराधी यूटीएस काउंटर से जारी टिकट को किया था स्क्रेच टिकट खरीदनेवाले को चिन्हित कर दबोच सकती पुलिसदरभंगा. दरभंगा जंकशन पर टिकट बदलने वाले गिरोह के किसी भी सदस्य का चेहरा रेल प्रशासन के सामने नहीं आ सका. सीसीटीवी कैमरा के फूटेज में इनके चेहरे नहीं मिले. अपराधियों ने यात्रियों से कैमरे के दायरे से बाहर जाकर टिकट बदलने का खेल खेला. लिहाजा रेल प्रशासन निराश हो चला है. हालांकि रेलवे अगर चाहे तो जालसाज गिरोह में शामिल एक संदिग्ध को जरूर दबोच सकती. लेकिन इसके लिए रेल प्रशासन को थोड़ी सी अपनी दृष्टि को विस्तार देना होगा. कारण जालसाजों ने एक कड़ी ऐसी छोड़ दी है, जिसे पकड़कर अपराधी तक प्रशासन पहुंच सकता है. जीआरपी थानाध्यक्ष अगर इस नजरिए से छानबीन शुरू करें तो अपराधी जल्द ही सलाखों के अंदर होगा. उल्लेखनीय है कि 15 दिसंबर को टिकट चेकिंग के दौरान टीटी ने तीन यात्रियों के पास से पांच स्क्रेच टिकट बरामद किये. सीनियर डीसीएम की मौजूदगी में चल रही विशेष चेकिंग में इस मामले के सामने आने के बाद डीआरएम तक खबर पहुंच गयी. वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक बीएनपी वर्मा ने खुद पीडि़तों से जानकारी ली. डीआरएम सुधांशु शर्मा ने जालसाजों को चिन्हित करने के लिए सीसीटीवी फूटेज अपने पास मंगवाया. सूत्रों के अनुसार यूटीएस काउंटर के साथ ही बाहर लगे सीसीटीवी का दायरा भवन परिसर तक ही सीमित है. दोनों जालसाजों ने पोर्टिको में पीलर के किनारे यह कारनामा किया. लिहाजा सीसीटीवी में इन जालसाजों के चेहरे कैद नहीं हो सके. कई बार गौर करने पर भी किसी की हड़कत संदेहास्पद नहीं दिखी. मंडल रेल प्रबंधक ने काउंटर क्लर्क की गतिविधि को भी फूटेज में खंगाला. करीब सवा नौ बजे एक महिला बुकिंग क्लर्क अपनी जगह से उठकर कहीं जाती नजर आयी. इसके बाद फिर वह अपने काम में जुट गयी. हालांकि इस मामले में अगर रेल प्रशासन पूर्व में यूटीएस काउंटर से लिये गये मधुबनी के जेनरल टिकट खरीदने वाले का चेहरा चिन्हित करना चाहे तो सहजता से हो जायेगा. उल्लेखनीय है कि निकटवर्ती स्टेशन का टिकट खरीदकर गंतव्य स्टेशन का नाम, दूरी, व किराया को खरोंचकर मुहर के माध्यम से दूसरे स्टेशन का नाम, दूरी व किराया अंकित कर इस धंधे को अंजाम दिया जाता है. गौरतलब है कि इन पांच स्क्रेच टिकट में दो 24841472 व 24841473 टिकट बाहरी परिसर स्थित जेटीबीएस काउंटर संख्या 39 से सुबह 8.05 बजे खरीदा गया था. इस टिकट से रेल प्रशासन को कुछ भी हासिल नहीं हो सकता. लेकिन अन्य तीन टिकट 24865707, 24865708 व 24865709 जंकशन स्थित यूटीएस काउंटर संख्या 2 से खरीदे गये थे. इस टिकट के जारी होने का समय 8.55 अंकित है. अगर सीसीटीवी फूटेज में काउंटर संख्या 2 से इस समय टिकट लेनेवाले को चिन्हित किया जाय तो सहजता से जालसाज तक पहुंचा जा सकता है. यह भी हो सकता है कि यह टिकट खरीदनेवाला इस गिरोह का सदस्य हो. सदस्य नहीं भी होगा तो भी इसके माध्यम से उस तक पहुंचा जा सकता है. देखना है रेल प्रशासन इसपर गौर कर अपनी छानबीन आगे बढ़ाती है या फिर खानापूरी कर सो जाती है. वैसे अब यह मामला जीआरपी के पाले में है. हालांकि जीआरपी को पीडि़त ने कांड अंकित नहीं करने की बात लिखित रूप से कही है. ऐसे में अगर थानाध्यक्ष सुमन प्रसाद सिंह कर्त्तव्यनिष्ठा का परिचय देंगे तभी छानबीन आगे बढ़ सकेगी.
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