पम्पसेट के भरोसे चल रही है धान की रोपनी

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फॉरवार्डेड ::::::::फोटो फाइल नेम-: 22 जुलाई जाले फोटोचित्र परिचय-: पम्पसेट से खेतों में पानी देते किसान तथा मेड़ों को दुरुस्त करती उनकी पत्नीजाले : इन्द्रदेव के कोपभाजन के शिकार प्रखंड क्षेत्र के किसानों को पम्पसेट के भरोसे ही धान की रोपनी करनी पड़ रही है़ वर्षा की प्रत्याशा छोड़ ज्यादातर किसान पम्पसेटों से अपने खेतांे […]

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फॉरवार्डेड ::::::::फोटो फाइल नेम-: 22 जुलाई जाले फोटोचित्र परिचय-: पम्पसेट से खेतों में पानी देते किसान तथा मेड़ों को दुरुस्त करती उनकी पत्नीजाले : इन्द्रदेव के कोपभाजन के शिकार प्रखंड क्षेत्र के किसानों को पम्पसेट के भरोसे ही धान की रोपनी करनी पड़ रही है़ वर्षा की प्रत्याशा छोड़ ज्यादातर किसान पम्पसेटों से अपने खेतांे को पानी देकर जैसे-तैसे धान-रोपनी कर रहे हैं़ इलाके के पंडित-पुरोहित कहते हैं कि आध्यत्मिक दृष्टिकोण से आषाढ़ मास में अधिमास पड़ने के कारण अच्छी बरसात होती है़ मगर मौसम की बेरुखी ने इलाके के किसानों को पम्पसेट के सहारे ही धानकी खेती करने को मजबूर कर दिया है़ पिछले रबी की खराब फसल ने तो पहले से ही किसानों की कमर तोड़ कर रख दिया है. उपर से महंगी डीजल का खर्च बचे खुचे उनकी गाढ़ी कमाई को चपत कर रहा है़ चूंकि धान की फसल पूरी तरह पानी पर ही निर्भर रहता है और किसानों को किसानी के अलावा और कोई काम रहता भी नहीं है. इसलिए सरकार द्वारा भी थोड़ी बहुत फसल क्षति मुआवजा की राशि देकर किसानों का संात्वना भर देने का काम करती है़ पटवन के लिए विभागीय दावे तो बहुत किए गये लेकिन परिणाम शून्य नजर आता दिख रहा है़ प्रखंड क्षेत्र में लगाये गए सभी सरकारी नलकूप किसी न किसी कारणवश वषोंर् से बंद पड़े हैं. जिसको सुधि लेने वाला कोई नहीं है़ सरकार द्वारा अनुदानित दर पर दिये जाने वाले बीजों का बिचड़ा तैयार खड़ा है जिसे खेतों में लगाना किसानों के लिए एक समस्या का रुप ले लिया है़ इसी वजह से किसान पम्पसेटों से अपने खेतों को पानी देकर धान का बिचड़ा लगाने को मजबूर हैं़

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