तीन ईसीजी मशीन के भरोसे होती है दो हजार मरीजों की जांच

Updated at : 03 Jul 2018 5:30 AM (IST)
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तीन ईसीजी मशीन के भरोसे होती है दो हजार मरीजों की जांच

दरभंगा : डीएमसीएच में रोजाना लगभग दो हजार मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं. बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की उम्मीद में जब वे यहां पहुंचते हैं तो निराशा ही हाथ लगती है. अस्पताल में सामान्य सुविधा प्राप्त करने के लिए भी मरीज व परिजनों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है. इधर से उधर भटकना पड़ता है. […]

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दरभंगा : डीएमसीएच में रोजाना लगभग दो हजार मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं. बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की उम्मीद में जब वे यहां पहुंचते हैं तो निराशा ही हाथ लगती है. अस्पताल में सामान्य सुविधा प्राप्त करने के लिए भी मरीज व परिजनों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है. इधर से उधर भटकना पड़ता है. मेडिसीन विभाग के ओपीडी में रोजाना करीब 700 मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं. अन्य विभागों की भी स्थिति कुछ इसी तरह की है.

अस्पताल में हृदय रोग की जांच करने वाली ईसीजी मशीन केवल तीन है. दो मशीन मेडिसीन विभाग में है. इसमें एक मशीन डायलिसीस यूनिट एवं दूसरा वार्ड में मौजूद है. वहीं तीसरा मशीन आपातकालीन विभाग में है. मशीनों की कम संख्या के कारण मरीजों को जांच करवाने में काफी परेशानी होती है. कई मरीजों की जांच सही समय पर नहीं होने के कारण उपचार सही ढंग से नहीं हो पाता है. कई मरीज बिना जांच कराये लौट जाते हैं. इसे लेकर रोजाना मरीज व कर्मी में नोकझोंक देखने को मिल रही है.

केंद्रीय आपातकालीन विभाग में अलग से मशीन नहीं
केंद्रीय आपातकालीन विभाग में करीब 250 मरीज रोजाना आते हैं. आपातकालीन विभाग में ऐसे मरीजों के लिए अलग से इसीजी मशीन की व्यवस्था नहीं है. यहां रखे एकलौते मशीन से दो अन्य विभाग के मरीजों की जांच की जाती है.
चार वर्ष से नहीं मिल रहा मानदेय
अस्पताल में छह इसीजी टेक्नीशियन कार्यरत है. वर्ष 2013 में उनकी नियुक्ति बिहार सरकार द्वारा संविदा पर की गयी थी. 2014 से अभी तक इनका भुगतान नहीं हो पाया है.
एक मशीन से होता तीन विभागोें का काम
ओपीडी, इमर्जेंसी व सीसीडब्ल्यू विभागों के मरीजों की जांच के लिए मात्र एक इसीजी मशीन उपलब्ध है. यह मशीन आपातकालीन विभाग में रहता है. इस कारण आपातकालीन विभाग में मरीजों की भीड़ लगी होती है. वहां जांच के लिये मरीजों को घंटों रुकना पड़ता है. भीड़ के कारण वहां रोजाना अफरा-तफरी मची रहती है. घंटों बैठने के बाद ही जांच संभव हो पाता है.
इएसआर ट्यूब नहीं रहने से मरीजों की नहीं हुई जांच
डीएमसीएच के धोबीघाट स्थित पैथोलॉजी जांच घर में सोमवार को इएसआर टयूब नहीं रहने के कारण मरीजों का इएसआर जांच नहीं हो सका. इएसआर जांच नहीं होने के कारण मरीजों में अफरा-तफरी मच गयी. इएसआर जांच टीबी, एनेमिया, आर्थराइटिस आदि रोगों को लेकर की जाती है. बता दें कि रोजाना करीब तीन दर्जन से ज्यादा मरीज इएसआर जांच के लिये सेंटर पहुंचते हैं. सोमवार को जांच नहीं होने के कारण मरीजों को वापस जाना पड़ा. इएसआर जांच के लिये मरीज व परिजन बाहर के निजी जांच घर में जाने के लिए मजबूर हो गये. बाहर में इस जांच के लिए मरीजों को सौ से दो सौ रुपये तक शुल्क चुकाना पड़ा. बताया जाता है कि केमिकल समाप्त हो जाने के कारण जांच नहीं हो सका. अन्य जांच में उपयोग होने वाला केमिकल भी लगभग समाप्त होने वाला है. अगले दो दिनो में केमिकल उपलब्ध नहीं होने पर जांच सेंटर में ताला लटक जाएगा.
कर्मियों की कमी से भी होती है परेशानी
आपातकालीन विभाग समेत मेडिसीन विभाग में जब मरीजों को जांच के लिए लाया जाता है, कई बार पता चलता है कि कर्मी दूसरे विभाग में जांच करने गया हुआ है. इसके बाद कर्मी को ढ़ूढ़ने में मरीज व परिजनों को पसीने बहाना पड़ता है. सही समय पर जांच नहीं होने के कारण उनको कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. मजबूर होकर मरीज को बाहर से जांच करवाना पड़ता है.
मशीन लेकर विभागों में घूमते हैं कर्मी तीन विभाग के एकलौते इसीजी मशीन को लेकर कर्मी जांच के लिए विभाग दर विभाग भी घूमता है. वैसे मरीजों की जांच के लिए कर्मी को विभागो में जाना पड़ता है जो अशक्त होते हैं.
तकनीकी कर्मियों की कमी को दूर किया जायेगा
अस्पताल में तकनीकीकर्मियों की व्यवस्था की दिशा में प्रयास किया जा रहा है. वहीं जल्द ही केमिकल मुहैया करवा दिया जायेगा.
डॉ संतोष कुमार मिश्र,
अधीक्षक, डीएमसीएच
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