रैगिंग मामले में डीएमसी प्रशासन को दूसरा झटका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Dec 2017 5:21 AM (IST)
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छात्रों के हित में एमसीआइ को उठाना पड़ा कदम एंटीरैगिंग कमेटी भी सवालों के घेरे में दरभंगा : दरभंगा मेडिकल कॉलेज प्रशासन को रैगिंग मामले में एमसीआइ ने दूसरी बार झटका दिया है. एमसीआइ ने छात्रों के हित में मंगलवार को डीएमसी प्राचार्य को फोन कर तत्काल प्रभाव से क्लास से सस्पेंड किये गये 61 […]
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छात्रों के हित में एमसीआइ को उठाना पड़ा कदम
एंटीरैगिंग कमेटी भी सवालों के घेरे में
दरभंगा : दरभंगा मेडिकल कॉलेज प्रशासन को रैगिंग मामले में एमसीआइ ने दूसरी बार झटका दिया है. एमसीआइ ने छात्रों के हित में मंगलवार को डीएमसी प्राचार्य को फोन कर तत्काल प्रभाव से क्लास से सस्पेंड किये गये 61 छात्राओं को कक्षा करने की अनुमति प्रदान करने के आदेश दिये. इसके बाद डीएमसी प्राचार्य डॉ आरके सिन्हा को झुकना पड़ा और एमसीआइ के निर्देश के आलोक में कक्षा से निष्काषित किये गये छात्राओं को कक्षा करने की अनुमति प्रदान की. प्राचार्य द्वारा अनुमति मिलते ही छात्राएं बुधवार से कक्षा में शामिल हुई.
बता दें कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज के ओल्ड गर्ल्स हॉस्टल में प्रथम सत्र की जूनियर छात्राओं से लगातार सीनियर छात्राओं द्वारा रैगिंग करने को लेकर किसी जूनियर छात्रा ने पिछले महीने एमसीआइ को पत्र लिखा था. मामला जब दिल्ली एमसीआइ पहुंचा तो वहां से डीएमसी में हो रही रैगिंग मामले की जांच कर कार्रवाई के लिये 16 नवंबर को आदेश दिये गये. इसके बाद डीएमसी प्रशासन की नींद टूटी. डीएमसी प्राचार्य डॉ आरके सिन्हा ने आनन-फानन में 17 नवंबर को रैगिंग कमेटी को मामले की जांच के आदेश दिये. बताया जाता है कि रैगिंग कमेटी ने 17 नबंबर को ही बिना गहन छानबीन किये ही प्रथम व तृतीय सत्र की छात्राओं को तलब कर सामूहिक रुप से पूछताछ की. कमेटी ने नियम का हवाला देते हुये प्रथम व तृतीय सत्र की तमाम छात्राओं को दोषी मानते हुये सामूहिक जुर्माना लगा दिया. छात्राएं जब जुर्माना नहीं दी तो छात्राओं को क्लास से सस्पेंड कर दिया था.
छात्राओं ने एमसीआइ को पूरी जानकारी दी और पुन: विचार करने का आग्रह किया तो एमसीआइ ने छात्राओं को राहत दे दी. बता दें कि वर्ष 2015 में ब्यायज छात्रावास में रैगिंग को लेकर भी डीएमसी प्रशासन के पहल पर छात्रों पर कार्रवाई की गयी थी. इसे बाद में एमसीआइ ने ही वापस ले लिया था. दोनों ही मामले में प्राचार्य डॉ आरके सिन्हा थे. एमसीआइ द्वारा छात्रों के हित में लिये गये फैसले से छात्रों में खुशी है. वहीं कॉलेज प्रशासन के प्रति छात्रों में भारी नाराजगी देखी जा रही है.
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