उदय के घर में तीन दिन से नहीं जल रहा चूल्हा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Sep 2017 5:46 AM (IST)
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शनिवार को पानी में डूब जाने से हो गयी थी मौत, कमाऊ पूत के असमय निधन से सदमे में परिवार कमतौल : कमाउ पुत्र के निधन से अहियारी दक्षिणी पंचायत के गंगासागर टोला निवासी तेज नारायण राय समेत पूरा परिवार गमगीन है. घटना के तीसरे दिन भी गांव में मातमी सन्नाटा फैला रहा. परिवार का […]
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शनिवार को पानी में डूब जाने से हो गयी थी मौत, कमाऊ पूत के असमय निधन से सदमे में परिवार
कमतौल : कमाउ पुत्र के निधन से अहियारी दक्षिणी पंचायत के गंगासागर टोला निवासी तेज नारायण राय समेत पूरा परिवार गमगीन है. घटना के तीसरे दिन भी गांव में मातमी सन्नाटा फैला रहा. परिवार का पशुपालन कारोबार संभालने वाला 18 वर्षीय पुत्र उदय शंकर शनिवार को नरजोरा चौर में डूब रहे मौसरे भाई-बहन को बचाने के क्रम में खुद भी डूब गया था. परिजन सहित टोले वासी नियति को कोस रहे हैं. कमाऊ पूत की मौत के बाद पूरा परिवार सदमे में है. तीन दिन से घर में चूल्हा नहीं जला है.
नाते-रिश्तेदार आकर सांत्वना दिला रहे हैं पर बावजूद परिजनों के आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा है. उदय की शादी नहीं हुई थी. मां कौशल्या देवी की आह है कि बेटे के सिर पर सेहरा बंधा देखने की आस अधूरी रह गई. परिवार का पशुपालन कारोबार कौन संभालेगा? करीब दो दर्जन बच्चा सहित भैंस और दरवाजे पर खड़ी घोड़ी की देखभाल अब कैसे संभव होगा? इस बात की चिंता पिता को खाये जा रही है. परिजनों को चिंता सता रही है कि पुत्री रूपम की शादी और सबसे छोटे पुत्र राजा की पढ़ाई-लिखाई कैसे होगी.
घोड़ा पालने का शौकीन था उदय
मृतक उदय के पिता तेज नारायण राय ने रुंधे गले से बताया कि उदय की मौत परिवार के लिए दूसरा बड़ा आघात है. 2008 में एक पुत्र की मौत के बाद विनय और सोनू कृषि तथा उदय पशुपालन (भैंस और घोड़ा) का कारोबार संभाल रहा था. दो पुत्री की शादी हो गयी है. तीसरी पुत्री रूपम सातवां में और छोटा पुत्र राजा चौथा में पढ़ता है. चाचा बलिराम राय ने बताया कि उसे घोड़ा पालने का शौक था. अपने हाथ से घोड़ा को खिलाता-पिलाता था. घुड़सवारी भी करता था. किसी आयोजन में घोड़े की मांग होने पर पूरे मनोयोग से घोड़े को सजाता था. फिर पगड़ी बांध कर सवार हो जाता था. उसकी याद वर्षो तक परिजनों को आती रहेगी. भाई विनय ने बताया कि भैंस पर तो कोई असर नहीं देख रहे, परंतु उदय के नहीं रहने का असर घोड़ी पर दिख रहा है. वह भी तीन दिनों से उदास नजर आ रही है. वह पहले की तरह खा-पी नहीं रही है. सामने जाने पर सिर्फ हिनहिनाती है.
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