रेलवे स्टेशन व तालाब के किनारे लोगों ने डाला डेरा

Published at :18 Aug 2017 5:15 AM (IST)
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रेलवे स्टेशन व तालाब के किनारे लोगों ने डाला डेरा

इलाके में कहीं नजर नहीं आ रही सरकारी या निजी नाव जिला प्रशासन ने कहा, नाव उपलब्ध होने पर भेज देंगे घरों में कैद होकर रह गयी जिंदगी क्षेत्र में न नेता नजर आ रहे न प्रशासनिक अिधकारी कमतौल : बाढ़ से परेशान लोग जगह-जगह शरण लिये हुए हैं. विशेषकर निचले इलाके में रहने वाले […]

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इलाके में कहीं नजर नहीं आ रही सरकारी या निजी नाव

जिला प्रशासन ने कहा, नाव उपलब्ध होने पर भेज देंगे
घरों में कैद होकर रह गयी जिंदगी
क्षेत्र में न नेता नजर आ रहे न प्रशासनिक अिधकारी
कमतौल : बाढ़ से परेशान लोग जगह-जगह शरण लिये हुए हैं. विशेषकर निचले इलाके में रहने वाले पीड़ित उंची जगहों पर किसी तरह से रहने का जुगार कर समय काट रहे हैं. कमतौल तथा उसके आसपास के गांव के लोग रेलवे स्टेशन, स्कूल भवन तथा तालाबों के भिंडा पर डेरा डाले हैं. वैसे तो 26 पंचायत वाले जाले प्रखंड का अधिकांश भाग बाढ़ से प्रभावित है. इनमें करीब एक दर्जन से ज्यादा गांव बुरी तरह से प्रभावित हैं. गुरुवार को तीसरे दिन भी हालात सामान्य नहीं हो सका है. कमतौल से जाले और भरवाड़ा पथ पर पानी का बहाव जारी है. इस पथ पर यातायात अबरूद्ध है. बाढ़ पीड़ित जानमाल की सुरक्षा के लिए परिवार सहित कमतौल और मुरैठा रेलवे स्टेशन, डीकेबीएम पथ, गांव के विद्यालयों सहित कई ऊंचे स्थानों में शरण लिए हुए हैं.
मुरैठा, मस्सा, ढढ़िया, बेलवारा, मिल्की, करवा, रमौल, निमरौली, मिर्ज़ापुर, ततैला, सिसौनी सहित अहियारी उत्तरी के गैसरी और टारा आदि गांव के लोग घर में कैद होकर रह गये हैं. अहल्यास्थान स्थित संस्कृत उवि परिसर में कई परिवार मवेशी के साथ शरण लिए हैं. वहीं सिंहवाड़ा प्रखंड के तिरसठ, कनौर सहित कई अन्य गांव के हालात बदतर हैं. बाढ़ पीड़ित एक अदद नाव के लिए तरस रहे हैं. पूर्व पंसस मो. कैफ कहते हैं कि तीन दिन से पूरा इलाका बाढ़ से प्रभावित है. कोई सुधि लेने नहीं आया है. एक नाव की मांग की गयी, वह भी उपलब्ध नहीं हो सकी. प्रखंड प्रशासन ने नाव नहीं होने की बात कहते हुए, उपलब्ध होने पर भेजने का भरोसा दिलाया है.
राहत सामग्री तलाश रहे बाढ़ पीड़ित : कमतौल. तीन दिनों से बाढ़ की विभीषिका का सामना कर रहे जाले प्रखंड के लोग अब राहत सामग्री की तलाश कर रहे हैं. सरकारी अधिकारियों से इसे लेकर सवालात किया जाने लगा है. लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव को लेकर कुछ नहीं किया जा रहा है.
पीड़ित आपसी सहयोग तथा भगवान के भरोसे समय काट रहे हैं. राहत कार्य शुरू नहीं होने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है. बता दें कि करवा-तरियानी पंचायत के सिसौनी के महाराजी बांध, अधवारा समूह के खिरोई नदी के पश्चिमी तटबन्ध दो स्थानों पर और मधुबनी जिला के बिस्फी प्रखंड में रघौली के समीप महाराजी बांध दो स्थानों पर टूटने से करीब दो दर्जन से ज्यादा गांव तीन दिनों से भीषण बाढ़ की चपेट में है. प्रभावित इलाके में कभी जलस्तर में कमी तो कभी बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है. नदियों के जलस्तर में कमी नहीं होने से खतरा बरकरार है. जगह-जगह एनडीआरएफ की टीम बचाव कार्य में लगी है.
इलाज के अभाव में मर गया मोहन : कमतौल. बाढ़ का साइड इफेक्ट अब सामने आने लगा है. चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने से लोग असमय काल के गाल में समा रहे हैं. करवा के पूर्व मुखिया आफाक आलम ने बताया कि नाव नहीं मिलने के कारण बीमार लोगों को इलाज के लिए बाहर निकालने में परेशानी हो रही है. दो बीमार व्यक्तियों को परिजन किसी तरह इलाज के लिए बेनीपट्टी ले जा रहे थे. मेघवन मुख्य सड़क तक पहुंचते-पहुंचते उनकी मृत्यु हो गयी. मृतक में मोहन राम समेत एक अन्य शामिल है.
महाराजी बांध पर बढ़ा पानी का दबाव : कमतौल. स्थानीय महाराजी बांध पर पानी का दबाब बढ़ गया है. बांध टूट नहीं जाए इसको लेकर ग्रामीण वहां लगातार मुस्तैद हैं. बांध टूटने पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एक बार फिर से जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है. चिंतित ग्रामीण व पूर्व मुखिया रंजीत ठाकुर, पंकज कुमार, श्याम बाबू, सुभाष ठाकुर, प्रभात, अंजनी सहित कई लोगों ने बताया कि खतरा टला नहीं है. बांध टूटने पर स्थिति और विकट हो जाएगी. लोग दिन-रात बांध की निगरानी कर रहे हैं.
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