कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की टेंशन, कर्ज, तनाव और बीमारियों का बढ़ा खतरा

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Weak Monsoon Impact on Farmers

AI जेनरेटेड फोटो

Weak Monsoon Impact on Farmers: दरभंगा के किसानों ने कमजोर और अनियमित मॉनसून से खेती, आय और स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई है. कृषि विशेषज्ञों ने कम पानी वाली फसलों और जल संरक्षण की सलाह दी है.

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दरभंगा के कमतौल से शिवेंद्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट

Weak Monsoon Impact on Farmers: दरभंगा जिले के कमतौल और जाले क्षेत्र के किसानों के लिए इस बार कमजोर और अनियमित मॉनसून नई चिंता लेकर आया है. समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेती प्रभावित हो रही है. इसका असर केवल फसल तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी साफ दिखाई देने लगा है.

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बारिश की कमी से बढ़ी आर्थिक चिंता

जाले के प्रगतिशील किसान धीरेन्द्र सिंह समेत कई किसानों ने बताया कि कमजोर मॉनसून का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ रहा है. पर्याप्त वर्षा नहीं होने से फसलों की पैदावार घटने की आशंका बढ़ गई है, जबकि सिंचाई और खेती की लागत लगातार बढ़ रही है.

किसानों का कहना है कि उत्पादन कम होने पर आमदनी घटती है, जबकि खर्च बढ़ जाता है. ऐसे में कई किसानों को कर्ज का सहारा लेना पड़ता है, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है.

तनाव और अवसाद का बढ़ रहा खतरा

किसानों के अनुसार लगातार फसल खराब होने, बढ़ते कर्ज और भविष्य की अनिश्चितता के कारण मानसिक तनाव बढ़ रहा है.

उनका कहना है कि आय का प्रमुख स्रोत खेती है. जब फसल प्रभावित होती है तो परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है. इससे चिंता, अवसाद और एंग्जायटी जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं.

तेज धूप में सिंचाई से बिगड़ रही सेहत

बारिश नहीं होने के कारण किसान ट्यूबवेल और पंपिंग सेट के सहारे खेतों की सिंचाई कर रहे हैं.

लगातार तेज धूप और उमस में काम करने से डिहाइड्रेशन, थकान और शारीरिक कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. किसानों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसे हालात बने रहने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और बढ़ सकती हैं.

धूल और मिट्टी से बढ़ रहा बीमारी का खतरा

सूखे जैसी स्थिति में खेतों में धूल और मिट्टी अधिक उड़ती है. ऐसे वातावरण में लगातार काम करने से सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

किसानों का कहना है कि पोषण की कमी और लगातार मेहनत से स्वास्थ्य पर दोहरा असर पड़ रहा है.

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कृषि विशेषज्ञों ने दी यह सलाह

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा आधारित क्षेत्रों के किसानों को बदलते मौसम के अनुसार खेती की रणनीति अपनानी चाहिए.

उन्होंने किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली दालें, तिलहन और मोटे अनाज जैसी फसलों की खेती करने की सलाह दी है. साथ ही जल संरक्षण और माइक्रो इरिगेशन तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि कम पानी में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सके.

किसानों की नजर अब बारिश पर

फिलहाल किसान अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए हुए हैं. उनका मानना है कि आने वाले दिनों में यदि पर्याप्त वर्षा होती है तो खरीफ फसलों को कुछ राहत मिल सकती है. वहीं कृषि विशेषज्ञ किसानों से मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की अपील कर रहे हैं.

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Aaruni Thakur

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