Darbhanga संस्कृत विश्वविद्यालय में 3 लोगों ने प्रशासन से परेशान हो दिया इस्तीफा,जानें क्या है पूरा मामला

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Oct 2022 5:50 AM

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Darbhanga: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली से खिन्न होकर अधिकारियों ने अपने-अपने पद से इस्तीफा देना शुरु कर दिया है. तीन अधिकारियों ने कुलपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. विवि सूत्रों के अनुसार कुछ अन्य अधिकारी भी इस्तीफा देने जा रहे हैं.

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Darbhanga: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली से खिन्न होकर अधिकारियों ने अपने-अपने पद से इस्तीफा देना शुरु कर दिया है. तीन अधिकारियों ने कुलपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. विवि सूत्रों के अनुसार कुछ अन्य अधिकारी भी इस्तीफा देने जा रहे हैं. जिन अधिकारियों ने पद से मुक्त करने के लिए आवेदन दे दिया है उसे कुलपति ने स्वीकार कर लिया है. प्राधिकार प्रभारी सह दूरस्थ शिक्षा निदेशक पद से प्रो. श्रीपति त्रिपाठी, विशेष पदाधिकारी (परीक्षा) पद से तेज नारायण झा तथा विधि पदाधिकारी पद से डॉ नवीन कुमार झा ने इस्तीफा दिया है. हालांकि अब तक विवि प्रशासन ने इन अधिकारियों को कार्यमुक्त करने से संबंधित अधिसूचना अबतक जारी नहीं की है.

चार अन्य पदाधिकारियों के भी पद छोड़ने की चर्चा

अन्य जिन पदाधिकारियों के पद छोड़ने की विवि परिसर में चर्चा है, उनमें डीआरटू डॉ सुनील कुमार झा, डीआर वन डॉ दीनानाथ साह, शोध प्रभारी डॉ दयानाथ झा एवं डीएसडब्ल्यू डॉ सुरेश्वर झा का नाम शामिल है. विवि सूत्रों की मानें तो जिन पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया है तथा जिनके देने की संभावना जतायी जा रही है, वे सभी विवि की कार्यप्रणाली से खिन्न हो चुके हैं. इन लोगों का कहना है कि जो फाइल आगे बढ़ती है, उसमें से अधिकांश कुलसचिव कार्यालय अथवा लेखा शाखा में जाकर रुक जाती है. वहां से फाइल निकलने की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है. कोई काम आगे नहीं बढ़ पा रहा. ऐसी स्थिति में निरर्थक बैठ कर समय व्यतीत करना पड़ता है.

फाइल बढ़वाने में कुलपति की नहीं सुन रहे अधिकारी व कर्मी

उन्होंने कहा तो यहां तक जा रहा कि कुलपति के हस्तक्षेप के बाद भी उन जगहों से फाइल निकाला जाना संभव नहीं हो पा रहा है. दोनों कार्यालय में रुकी फाइल को आगे बढ़ाने के लिये कुलपति द्वारा बार-बार दिया गया मेमो भी निष्क्रिय साबित होता है. इससे स्थिति यह उत्पन्न हो जाती है, कि जिन शिक्षाकर्मियों अथवा संबंधित लोगों से जुड़ी जो संचिका रुकी रहती है, उसके निष्पादन की स्थिति जानने के लिए लोग उस अधिकारी पर दबाव बनाने लगते हैं, जहां से संचिका बढायी गयी होती है. संबंधित अधिकारियों को सामने वाले का कोपभाजन भी बनना पड़ जाता है.

विवि में जुगाड़ तकनीक की चर्चा

चर्चा है कि संबंधित दोनों विभाग से फाइल बढ़वाने के लिये संबंधित लोगों को जुगाड़ टेक्नोलॉजी का सहारा लेना पडता है. इसके बाद काम होने की बात विवि सूत्र बताते हैं. इसका वे अनेकों उदाहरण सामने रखते हैं. विवि सेवा आयोग द्वारा चयनित 14 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति व पदस्थापन की अधिसूचना आयोग की अनुशंसा के नौ माह बाद हो सकी. अतिथि सहायक प्राध्यापकों की सेवा नियमितिकरण की अधिसूचना सात माह बाद भी अब तक नहीं हो सकी है. 19 संबद्ध शास्त्री कॉलेज सहित कई अंगीभूत कालेजों के करीब 125 शिक्षाकर्मियों का वेतन भुगतान करीब 10 महीना से लंबित है. न्यायादेश मामले को छोड़ कर करीब 200 सेवानिवृत्त शिक्षाकर्मियों को सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान अब तक नहीं हो सका है. दो माह पूर्व हुई सिंडिकेट की बैठक की कार्यवाही का प्रोसिडिंग अब तक सदस्यों को उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. चक्रानुक्रम में संकायाध्यक्ष बनाने की अधिसूचना छह माह बीतने के बावजूद अब तक जारी नहीं की गयी है.

रिपोर्ट: प्रवीण कुमार चौधरी

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