गर्मी का असर : पटना जू में चिम्पांजी खा रहा दही-चावल, भालू को दिया जा रहा शहद, घटी विजिटर्स की संख्या

Patna Zoo
गर्मी बढ़ने की वजह से जू के जानवरों के रखरखाव से लेकर उनके खान-पान तक में काफी कुछ बदलाव किया गया है. उन्हें मल्टीविटामिन भी दी जा रही है. चिम्पांजी को अब खीर की जगह पर दही-चावल दिया जा रहा है.
जूही स्मिता,पटना. राजधानी पटना का पारा 44.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. गर्मी और लू चलने की वजह से पटना ‘जू’ में आने वाले दर्शकों की संख्या में काफी कमी आयी है. ठंड और सामान्य मौसम में विजिटर्स की संख्या आम दिनों में 6-7 हजार होती है जबकि वीकेंड में इसकी संख्या 15-16 हजार तक हो जाती है. पर अभी आम दिनों में प्रतिदिन पांच हजार और वीकेंड पर मात्र 10 हजार लोग ही यहां आ रहे हैं. बुधवार को ‘जू’ प्रशासन ने बताया कि आम दिनों में दो हजार और वीकेंड पर पांच हजार विजिटर्स की संख्या घटी है. मालूम हो कि एक अप्रैल से 30 सितंबर तक जू के समय में बदलाव किया गया है. अब ‘जू’ सुबह पांच बजे से लेकर शाम छह बजे तक खुला रहता है. हालांकि विजिटर्स की इंट्री आठ बजे से होती है.
‘जू’ में विजिटर्स के लिए गेट नंबर एक और दो के पास वाटर कूलर लगाये गये हैं, ताकि यहां आने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो. इसके अलावा विभिन्न जानवरों के बाड़े के पास भी विजिटर्स के लिए प्याऊ लगाये गये हैं. यहां एक बड़े से घड़े में पानी भर कर रखा गया है. गैंडा और शेर के बाड़े के पास, मंदिर, बोटैनिकल गार्डन, सोविनियर शॉप आदि जगहों पर भी प्याऊ लगाये गये हैं.
गर्मी बढ़ने की वजह से जू के जानवरों के रखरखाव से लेकर उनके खान-पान तक में काफी कुछ बदलाव किया गया है. उन्हें मल्टीविटामिन भी दी जा रही है. चिम्पांजी को अब खीर की जगह पर दही-चावल दिया जा रहा है. सुबह से लेकर रात तक इन्हें फल में अंगूर 250 ग्राम, सेब आधा किलो, केला 750 ग्राम, डाभ, तरबूज और एक किलो अनार का जूस भी दिया जाता है. वहीं बाघ को 9-10 किलो, शेर को 8 किलो और तेंदुआ को दो-ढाई किलो मांस दिया जा रहा है. जबकि भालू को रोजाना आधा किलो तरबूज, केला, हरी सब्जियां दी जा रही हैं. जू प्रशासन की ओर से भालू के पिंजरे के बीच एक मिट्टी का बर्तन लटकाया गया है, जिससे शहद टपकता रहता है. नाइट हाउस में जानवरों के लिए बड़े-बड़े पंखे और कूलर लगाये गये हैं.
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संजय गांधी जैविक उद्यान के सभी जानवरों के पिंजरे में वाटर होल बनाये गये हैं, ताकि जानवरों को पानी की समस्या न हो. उन्हें लगातार विशेषज्ञों और चिकित्सकों की ओर से सीसीटीवी के जरिये मॉनिटरिंग और जरूरत पड़ने पर हेल्थ चेकअप भी किया जा रहा है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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