किसान, हक की लड़ाई के लिए हों एकजुट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Jan 2017 5:30 AM (IST)
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पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा, प्रशासनिक उदासीनता से फसल बीमा से वंचित है जिले के किसान गन्ना किसानों की हालत खराब, स्थानीय मिलों से पूर्जी नहीं मिलने पर गोपालगंज के चीनी मिलों को कर रहे गन्ना आपूर्ति बेतिया : कृषि प्रधान जिला चम्पारण के किसान बदहाल है आज महाराष्ट्र और बिहार के किसानों में मात्र […]
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पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा, प्रशासनिक उदासीनता से फसल बीमा से वंचित है जिले के किसान
गन्ना किसानों की हालत खराब, स्थानीय मिलों से पूर्जी नहीं मिलने पर गोपालगंज के चीनी मिलों को कर रहे गन्ना आपूर्ति
बेतिया : कृषि प्रधान जिला चम्पारण के किसान बदहाल है आज महाराष्ट्र और बिहार के किसानों में मात्र इतना ही फर्क है कि महाराष्ट्र के किसान आत्महत्या करते हैं और बिहार के किसान प्रताडित होकर भी घुट-घुट कर जीने को मजबूर है.
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय कुमार पाण्डेय ने प्रेस बयान जारी करते हुए कहा है कि गन्ना उत्पादक किसानों का जहां चीनी मिलों द्वारा वेराइटी के नाम पर शोषण किया जा रहा है. वहीं समय से गन्ना नहीं गिरने से समय पर खेत खाली नहीं हो पाया और किसान उसमें रबी फसलों की बुआई नहीं कर सके. अब योगापट्टी सहित कइ जगहों के किसान जिले में चीनी मिल होने के वावजूद गोपालगंज जिले के चीनी मिलों को गन्ना बेचने को मजबूर हैं .
पहले कुटीर उद्योग के रूप में किसानों द्वारा अपने क्रसर से अपने गन्ने का पेराई कर गुड तैयार करके खुले बाजार में अच्छे दामों पर बेच दिया जाता था ,जो एक समाधान था, लेकिन सरकार और प्रशासनिक तंत्र के सहयोग से इन चीनी मीलों ने इस कुटीर उद्योग को लगभग बंद ही करा दिया . जिले के चीनी मिलों द्वारा प्रत्येक गाडी तौल पर घटतौली एवं केन एक्ट का खुला उल्लंघन कर किसानों को आथिक शोषण किया जा रहा है . इस प्रकार निलहों के बाद मिलहों द्वारा जिले के किसान प्रताडित होने को मजबूर हैं ़ उन्होंने कहा है कि धान की खरीदारी अभी तक प्रारंभ नहीं होने से किसानों को अपने रबी फसल के खेती के लिए औने पौने दामों पर धान बेचने पर मजबूर होना पडा.
किसानों को सरकार द्वारा ़षि उपकरणों पर मिलने वाले अनुदान भ्रष्टाचार का भेट चढ गया है किसी जाँच एजेंसी द्वारा इसकी जाँच करायी जाय तो कृषि अनुदान राशियों में किसानों के व्यापक शोषण का स्वत: पर्दाफाश हो जाएगा. स्थिति तो यहां तक खराब है कि जो किसान परमिट मिलने पर अगर किसी प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान से किसी उपकरण का खरीदारी करता है तो पदाधिकारी उसका अनुदान राशि रोक देते हैं.
प्रशासनिक उदासीनता के कारण फसल बीमा योजना के लाभों से जिले के किसान बंचित होने को मजबूर हैं . उन्होंने कहा कि हम किसानों को जाति और पाटी से उपर उठकर अपने हक की लडाई लडनी होगी. तभी किसानों को उसके हक का लाभ मिल सकेगा.
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