हरनाटांड़ में बाघ की दहाड़ सुन ग्रामीणों ने किया रतजगा, दहशत

Published at :04 Dec 2016 5:57 AM (IST)
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हरनाटांड़ में बाघ की दहाड़ सुन ग्रामीणों ने किया रतजगा, दहशत

हरनाटांड (पचं) : हरनाटांड़ वन प्रक्षेत्र के बैरिया खुर्द गांव के ग्रामीण शुक्रवार की रात बाघ की दहाड़ सुन कर रात भर जागते रहे. लोग अपनी सुरक्षा के लिए घरों के सामने मशाल जला कर बैठे रहे. ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार की रात नौ बजे अचानक बाघ की दहाड़ सुनायी पड़ी. बाघ जानवरों के […]

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हरनाटांड (पचं) : हरनाटांड़ वन प्रक्षेत्र के बैरिया खुर्द गांव के ग्रामीण शुक्रवार की रात बाघ की दहाड़ सुन कर रात भर जागते रहे. लोग अपनी सुरक्षा के लिए घरों के सामने मशाल जला कर बैठे रहे. ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार की रात नौ बजे अचानक बाघ की दहाड़ सुनायी पड़ी. बाघ जानवरों के बथान की ओर बढ़ रहा था,

जो जंगल से मात्र 50 मीटर की दूरी पर है. तभी लोगों ने शोर मचाया. इसके बाद बाघ गन्ने के खेत में चला गया. वार्ड सदस्य नागेंद्र काजी, भिखारी काजी, संजय माझी व रामसिंह महतो समेत दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि जंगल से भटका नर बाघ शाम ढलते ही गांव के पास पहुंच दहाड़ने लगा. दहाड़ सुन कर ग्रामीणों ने मशाल जला कर शोर किया. शोर के बाद बाघ गन्ने के खेत में चला गया. सुबह भयभीत ग्रामीणों ने इसकी सूचना प्रभारी रेंजर आनंद कुमार को दी. रेंजर ने इसकी सूचना हरनाटांड़ के वन कर्मियों को दी.

बैरिया खुर्द गांव की घटना
ग्रामीणों की आवाज सुन गन्ने के खेत में गया बाघ
वन विभाग की टीम ने दिनभर की तलाश
ग्रामीणों को सतर्क रहने की दी गयी सलाह
पगमार्क के सहारे दिनभर होती रही खोज
सूचना के बाद शनिवार की सुबह वन विभाग की टीम ने जीपीएस लोकेशन के आधार पर बाघ की खोजबीन शुरू की. फॉरेस्टर ने बताया कि पग मार्क के आधार पर बाघ का लोकेशन लिया जा रहा है. बाघ की तलाश में वन कर्मियों की टीम पूरे दिन लगी रही, लेकिन पगमार्क मिलने के बाद भी बाघ कहीं नजर नहीं आया.
ग्रामीणों को गन्ना के खेतों में जाने पर सतर्कता बरतने व जंगल जाने से परहेज करने को कहा गया है
छह माह पहले भितहा
में देखा गया था बाध
भितहा के लेदिहरवा दियारा के सरेह में 19 जून व 21 जून की रात बाघ देखा गया था. उसने जंगली बछड़े को शिकार बनाया था. इसके बाद बाघ फिर 28 अगस्त को दिखा. तीन माह तक लेदिहरवा व आसपास के लोग बाघ के डर से दियारा में जाना छोड़ चुके थे. लेदिहरवा, मछहा व भूइधरवा के किसानों ने खेतों में जाना छोड़ दिया था. इस बीच वन विभाग रोज तटबधों पर सिर्फ उनके पग के निशान ढूंढता रहा.
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