वाल्मीकि वन्यजीव अभ्यारण्य इको सेंसेटिव जोन घोषित
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Jul 2016 5:47 AM (IST)
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प्रदूषण नहीं फैलाने वाले उद्योग, कुटीर उद्योग व बारिश के पानी को इकट्ठा करना होगी प्राथमिकता बेतिया : वीटीआर से सटे गावो में अब पत्थर का अवैध रूप से खनन नही हो सकेगा. जिला प्रशासन ने वाल्मिकी वन्यजीव अभ्यारण्य को ईको सेंसेटिव जोन घोषित कर दिया है़ यह जानकारी मंगलवार को डीडीसी राजेश कुमार मीणा […]
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प्रदूषण नहीं फैलाने वाले उद्योग, कुटीर उद्योग व बारिश के पानी को इकट्ठा करना होगी प्राथमिकता
बेतिया : वीटीआर से सटे गावो में अब पत्थर का अवैध रूप से खनन नही हो सकेगा. जिला प्रशासन ने वाल्मिकी वन्यजीव
अभ्यारण्य को ईको सेंसेटिव जोन घोषित कर दिया है़ यह जानकारी मंगलवार को डीडीसी राजेश कुमार मीणा ने अधिकारियो के साथ विशेष बैठक में दी. डीडीसी ने कहा कि वाल्मीकि वन्यजीव अभ्यारण्य, वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की सीमा से 15 किलोमीटर तक के विस्तार तक के क्षेत्र को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 के तहत इको सेंसेटिव जोन घोषित कर दिया गया है. इको-सेंसेटिव जोन का विस्तार 83.576 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर, 35 किलोमीटर से 5 किलोमीटर के विस्तार तक वल्मीकि वन्यजीव अभ्यारण्य, वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में है.
यह जोन जिले में 323 गांवों में फैला हुआ है. डीडीसी ने कहा कि इको-सेंसेटिव जोन घोषित के बाद उक्त क्षेत्र में विद्यमान सड़कों को चौड़ा और सुदृढ़ बनाया जायेगा. इसके अलावे पारिस्थितिक अनुकूल पर्यटन क्रियाकलापों के लिए पर्यटकों के अस्थायी आवासन के लिए पारिस्थितिक अनुकूल आरामगाह जैसे टेंट, लकड़ी के मकान आदि का निर्माण भी होगा. प्रदूषण नहीं करने वाले लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा भी मिलेगा.
इको-सेंसेटिव जोन में वाणिज्यिक खनन, पत्थर की खदान और उनको तोड़ने की इकाईयां स्थापित करने में प्रतिबंध रहेगा. जल, वायु, मृदा या ध्वनि प्रदूषण करने वाले उद्योगों एवं आरा मीलों की स्थापना पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. इसके अलावे उक्त क्षेत्र में किसी परिसंकटमय पदार्थो के उपयोग, नई वृहत ताप और जल विद्युत परियोजना की स्थापना आदि की मंजूरी नहीं मिलेगी.
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