अरे, यह कार्यालय है या कबाड़खाना

Published at :26 Apr 2016 6:37 AM (IST)
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अरे, यह कार्यालय है या कबाड़खाना

बेसमेंट में चलता है शिक्षा विभाग का कार्यालय कम रोशनी, दमघोंटू माहौल व संकुचित जगह में काम करने को विवश है कर्मी बेतिया : लाखों बच्चों के सर पर स्कूली छत मुहैया कराने वाला जिला शिक्षा महकमा खुद बदहाल है. बानुछापर स्थित जिला शिक्षा कार्यालय की स्थिति देख बरबस ही किसी के मुंह से निकल […]

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बेसमेंट में चलता है शिक्षा विभाग का कार्यालय

कम रोशनी, दमघोंटू माहौल व संकुचित जगह में काम करने को विवश है कर्मी
बेतिया : लाखों बच्चों के सर पर स्कूली छत मुहैया कराने वाला जिला शिक्षा महकमा खुद बदहाल है. बानुछापर स्थित जिला शिक्षा कार्यालय की स्थिति देख बरबस ही किसी के मुंह से निकल सकता है.
अरे, यह कार्यालय है या मुर्गीखाना. कार्यालय के कर्मी किस मनोदशा में कार्य करते है यह कार्यालय को देख कर ही अंदाजा लगाया जा सकता है. एक बड़े दो मंजिले भवन में जिला स्तरीय शिक्षा कार्यालय है. भवन के पहली मंजिल पर जिला शिक्षा पदाधिकारी बैठते है.
उनके बगल में सर्व शिक्षा अभियान की शाखा चलती है. भवन का बेसमेंट जिसकी ऊंचाई करीब आठ फीट है. उसे एक हॉल का लुक दिया गया है. जिसके पश्चिमी भाग में दो-तीन छोटे-छोटे केबिन बनाये गये है. जिसमें तीन डीपीओ बैठते है. इनके कार्यालय के कर्मी उसी हॉल में कार्य करते है.
हालत यह है कि बिजली चले जाने पर चारों तरफ दिन में ही घुप अंधेरा छा जाता है. कई बार तो अंधेरे के कारण कर्मी ही आपस में टकरा जाते है. पूरा हॉल विभागीय अलमारियों व बक्सों से भरा पड़ा है. दो अलमीरो की श्रृखंला के बीच बचे संकीर्ण जगहों में कर्मियों के टेबल लगे है. जहां वे दम घुंट-घुंट कर कार्य करने को विवश है.
तकरीबन सभी अलमारियों व बक्सों के ऊपर बेतरतीब ढंग से बंधी संचिकाओं की पोटली लादी गयी है. जो गाहे-बगाहे कर्मियों के सिर पर गिरती रहती है. कम रोशनी, दम घोंटु माहौल, संकुचित जगह में बैठ दर्जनों कर्मी शिक्षा का अलख कैसे जगायेगें सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
साक्षरता की पाठ्य सामग्रियों से बनी नारकीय स्थिति
भवन में कोढ़ में खाज की तरह है. साक्षरता की पुस्तके साक्षरता से जुड़ी हजारों पुस्तक जो जरूरत मंदों के पास होनी चाहिए. वह कार्यालय में रखी गयी है. डीपीओ चेंबर से लेकर पूरे हॉल में बिखरी साक्षरता की ये पुस्तके इस तरह बेतरतीब पडी है कि पैर रखना भी मुश्किल है.
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