संत घाट पर हजारों व्रती देंगे अर्घ

श्रीनगरः बैरिया प्रखंड क्षेत्र के संतघाट स्थित चंद्रावत नदी के किनारे बेतिया राज की महारानी भी अघ्र्य देती थी. बुजुर्गो का कहना हैं कि चंद्रावत नदी पर बेतिया राज की महारानी छठ व्रत करती थी. यह परंपरा आज भी कायम हैं. यहां प्रतिवर्ष हजारों व्रती अघ्र्य देती है. चंद्रावत नदी के दोनों किनारे भव्य सजावट […]
श्रीनगरः बैरिया प्रखंड क्षेत्र के संतघाट स्थित चंद्रावत नदी के किनारे बेतिया राज की महारानी भी अघ्र्य देती थी. बुजुर्गो का कहना हैं कि चंद्रावत नदी पर बेतिया राज की महारानी छठ व्रत करती थी. यह परंपरा आज भी कायम हैं. यहां प्रतिवर्ष हजारों व्रती अघ्र्य देती है. चंद्रावत नदी के दोनों किनारे भव्य सजावट किया गया है. घाट पर प्रवेश द्वार से लेकर नदी के तट तक हाइटेक व्यवस्था किया गया है.
दक्षिण तट पर हाट सरैया, संतघाट व उतर तट पर शहर के छठ व्रती भगवान सूर्य को अध्र्य देगी. समाज सेवी अजय कुमार ने बताया कि चंद्रावत नदी की गंडक नदी से जुड़ी है. जिससे यहां अघ्र्य देने की एक अलग महत्ता है. वैसे पूजहां, घोडहिया, पखनाहा, सिंगही, बैरिया, खिरियाघाट, सरैया समेत दर्जनों स्थानों पर छठ घाटों की साफ-सफाई के बाद सजावट अंतिम दौर में है.
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