सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट की बल्ले-बल्ले

Published at :29 Apr 2015 2:00 AM (IST)
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सरकारी स्कूल बंद, प्राइवेट की बल्ले-बल्ले

मैनाटांड : विगत नौ अप्रैल से नियोजित शिक्षक महासंघ द्वारा अपनी एक सूत्री मांग समान काम व समान वेतन के समर्थन में नियोजित शिक्षकों को अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाने से सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन करने वाले छात्रों पर बुरा असर पड़ रहा है. विगत 22 दिनों से बच्चों की पढ़ाई ठप है. लेकिन […]

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मैनाटांड : विगत नौ अप्रैल से नियोजित शिक्षक महासंघ द्वारा अपनी एक सूत्री मांग समान काम व समान वेतन के समर्थन में नियोजित शिक्षकों को अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाने से सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन करने वाले छात्रों पर बुरा असर पड़ रहा है. विगत 22 दिनों से बच्चों की पढ़ाई ठप है.
लेकिन इसका सुधी लेना वाला कोई नहीं दिख रहा है. चाहे प्रशासनिक अधिकारी हो या जनप्रतिनिधि सभी अपना-अपना पल्ला झाड़ जिम्मावारियों से बचने के फिराक में है. देश के कर्णधार कहे जाने वाले नौनीहालों की भविष्य पढ़ाई न होने से कितना बाधित हो रहा है शायद इसका अंदाजा जनप्रतिनिधियों को नहीं लग पा रही है. अगर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो शिक्षकों के हड़ताल का सबसे बुरा असर छात्रों पर पड़ेगा.
अभिभावकों की नजर प्राइवेट स्कूलों पर
शिक्षक व सरकार के बीच कोई सकारात्मक वार्ता न होता देख अभिभावक प्राइवेट स्कूलों के चक्कर लगाते दिख रहे हैं. अभिभावकों की माने तो आखिर कब तक विद्यालय खुलने का इंतजार किया जायेगा. लगातार 22 दिनों से विद्यालय बंद है. ऐसे में बच्चे जो सिखे भी है उसको भूल रहे हैं. मजबूरन बच्चों को प्राइवेट विद्यालयों में दाखिल कराना पड़ रहा है.
शोषण के शिकार हो रहे अभिभावक
प्राइवेट विद्यालय की फी में भी बढ़ोतरी हो गयी है. जब प्राइवेट विद्यालयों द्वारा अपने ही स्कूल में सजी दुकान से किताब, ड्रेस, खरीदने का दबाव अभिभावकों पर बनाया जाता है. अभिभावक जो कल तो फ्री किताब, मध्याह्न् भोजन आदि की बात करते थे, आज अपने बच्चों को भविष्य संवराने के लिए प्राइवेट विद्यालयों के नियमों का शिकार हो रहे हैं. शिक्षक नेता सुमित कुमार ने बताया कि नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन नहीं देगी तब तक हमारा आंदोलन चरणबद्ध तरीकों से जारी रहेगा. हमारी लड़ाई सरकार से है.
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