चंपारण ने ही रत्नाकर को वाल्मीकि व मोहन दास को बनाया महात्मा
Updated at : 21 Nov 2018 8:53 AM (IST)
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स्थापना दिवस पर याद किये गये बापू गौनाहा (प.चंपारण) : गांधी स्मारक संग्रहालय भितिहरवा के स्थापना के 101वीं वर्षगांठ पर महात्मा गांधी को शिद्दत से याद किया गया. देश के कोने-कोने से आये गांधीवादियों ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला. यहां आयोजित भव्य कार्यक्रम में गांधी शांति प्रतिष्ठान नयी दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत ने […]
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स्थापना दिवस पर याद किये गये बापू
गौनाहा (प.चंपारण) : गांधी स्मारक संग्रहालय भितिहरवा के स्थापना के 101वीं वर्षगांठ पर महात्मा गांधी को शिद्दत से याद किया गया. देश के कोने-कोने से आये गांधीवादियों ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला.
यहां आयोजित भव्य कार्यक्रम में गांधी शांति प्रतिष्ठान नयी दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत ने कहा कि तीर्थ यात्रा और इतिहास को वर्तमान से जोड़ने की आवश्यकता है. गांधी यहां प्रयोग करने नहीं, बल्कि पूरी तरह से परिपक्व होकर आये थे और चंपारण सत्याग्रह के सिद्ध सेनापति बने. महात्मा गांधी केंद्रीय विवि मोतिहारी के कुलपति प्रो. डॉ. अनिल ने कहा कि विकास की दौड़ में गांधी भी छूट रहे हैं.
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति नयी दिल्ली के निदेशक ने कहा कि यह योग की भूमि है. यहां नयी शिक्षा नीति और व्यक्तित्व के विकास पर काम करने की जरूरत है. पूर्व मंत्री सह गांधी स्मारक संग्रहालय मोतिहारी के सचिव डॉ. ब्रजकिशोर सिंह ने कहा कि भितिरहवा आश्रम बदरीनाथ, केदारनाथ से भी बड़ा तीर्थ स्थल है. डॉ. रोमल वर्मा ने चंपारण के इतिहास की बखान की. कहा कि चम्पारण की धरती महापुरूषों की धरती रही है. इस धरती ने रत्नाकर से वाल्मिकी, सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध व मोहन दास जैसे सख्श को महात्मा गांधी बनाया.
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