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सेंट्रल जेल में लगेगा बेकरी, चर्खा व फर्नीचर उद्योग

Updated at : 15 Jul 2020 10:08 AM (IST)
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सेंट्रल जेल में लगेगा बेकरी, चर्खा व फर्नीचर उद्योग

सेंट्रल जेल में लगेगा बेकरी, चर्खा व फर्नीचर उद्योग

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मोतिहारी. सेंट्रल जेल मोतिहारी के कैदी बेकरी प्रोडक्ट के साथ स्टील फर्नीचर व चर्खा से सूत काट खादी के कपड़े तैयार करेंगे. इसके लिए जेल में उद्योग लगाये जा रहे हैं. इससे कैदियों की आय भी बढ़ेगी, साथ ही सरकार को राजस्व भी मिलेगा.

जेल प्रशासन ने डीपीआर बना डीएम के पास प्रस्ताव भेज दिया है. जिला स्तर पर इसके लिए मंजूरी भी मिल गयी है. फाइल को अब मुख्यालय भेजी जायेगी. वहां से हरी झंडी मिलते ही उद्योग लगाने का काम शुरू हो जायेगा. सब कुछ ठीक रहा तो जुलाई के अंतिम महीना या फिर अगस्त के प्रथम सप्ताह से मशीनरी लग जायेगी. जेल अधीक्षक विदु कुमार ने बताया कि तीनों उद्योग पर करीब 60 लाख रुपये खर्च होंगे. बेकरी प्लांट बिहार के सिर्फ बेउर जेल में है.

मोतिहारी बिहार का दूसरा जेल होगा, जहां बेकरी प्रोडक्ट तैयार होगा. इसके साथ ही फर्नीचर उद्योग भी लगाया जा रहा है. अस्पताल बेड के साथ रैक, बुकसेफ, चेयर व ट्राॅली का निर्माण होगा. जेल में बने तमाम प्रोडक्ट पहले विभिन्न जेलों में सप्लाई होगा. बेउर दक्षिण बिहार व मोतिहारी उत्तर बिहार के जेलों में बेकरी प्रोडक्ट, फर्नीचर व खादी के कपड़ों की सप्लाई करेगा. जेल में बने प्रोडक्ट की बाजार में सप्लाई के लिए सरकार के आदेश पर डीएम बोर्ड बना निर्णय लेंगे. उद्योग लगने से कैदियों के मानदेय में बढ़ोतरी तो होगी ही, साथ में सरकारी राजस्व की बचत भी होगी. अगस्त के प्रथम सप्ताह से मशीनरी लगाने का काम शुरू हो सकता है.

बेकरी प्लांट लगाने में खर्च होंगे 25 लाख

बेकरी प्लांट लगाने में करीब 25 लाख खर्च होंगे. पहले ब्रेड प्रोडक्ट बनेगा, उसके बाद केकरी प्रोडक्ट यानी बिस्कुट, रस्क आदि का निर्माण किया जायेगा. जेल अधीक्षक ने बताया कि प्रोडक्ट के गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखा जायेगा. इसके लिए प्रशिक्षक द्वारा कैदियों को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा.

फर्नीचर उद्योग पर दस लाख

फर्नीचर उद्योग पर दस लाख खर्च होंगे. इसमे ट्राॅली के साथ अस्पताल का बेड, बुकसेफ व स्टील चेयर बनेगा. यहां के बने बेड उत्तर बिहार के जेलों के अस्पताल के लिए सप्लाई किया जायेगा. अधिकांश जेल अस्पताल का बेड बदहाल हो चुका है. कैदियों के बीच खाना वितरण करने के लिए बाल्टी का उपयोग होता था. अब ट्रॉली से खाना का वितरण होगा.

25 लाख रुपये की लागत से चर्खा उद्योग

जेल में 25 लाख के लागत से चर्खा उद्योग लगेगा. सूत से खादी के कपड़े की बुनाई होगी. बक्सर जेल में पहले से उद्योग लगा है. वही से खादी कपड़ा मंगा कर बंदियों को मास्क बनाने के लिए दिया गया था. उद्योग लगने के बाद मोतिहारी सेंट्रल जेल में खादी के कपड़े की बुनाई होगी. कैदियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.

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