उदीयमान सूर्य को अर्घ आज
Updated at : 03 Apr 2017 6:33 AM (IST)
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चैती छठ. अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दिया अर्घ, घाटों पर दिखी रौनक चार दिनों के अनुष्ठान के क्रम में तीसरे दिन के व्रत का समापन रक्सौल : लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के तीसरे दिन रविवार को छठ व्रतियों के द्वारा अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य दिया गया. छठ पूजा को लेकर रविवार […]
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चैती छठ. अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दिया अर्घ, घाटों पर दिखी रौनक
चार दिनों के अनुष्ठान के क्रम में तीसरे दिन के व्रत का समापन
रक्सौल : लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के तीसरे दिन रविवार को छठ व्रतियों के द्वारा अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य दिया गया. छठ पूजा को लेकर रविवार की दोपहर से ही शहर के विभिन्न छठ घाटों पर व्रतियों के आने का क्रम शुरू हो गया था. इधर, पूजा को लेकर शहर के विभिन्न छठ घाट को दुल्हन की तरह सजाया गया था. घाट पर जाने के दौरान कुछ व्रती मन्नत के अनुसार गाजे-बाजे के साथ घाट पर पहुंचे तो कुछ लोग दंड प्रणाम करते
हुए घाट पर पहुंचे और इसके बाद नदी सरोवर में स्नान कर भगवान भास्कर की पूजा की और छठी मइया से सबके कल्याण की कामना की.
यहां बता दे कि चार दिनों तक चलने वाले छठ पर्व के दूसरे दिन शनिवार की शाम व्रतियों के द्वारा खीर व रोटी का प्रसाद तैयार कर खरना मनाया गया था.
इधर, रविवार को छठ पूजा को लेकर शहर के आश्रम रोड स्थित छठिया घाट, सूर्य मंदिर छठ घाट, नागा रोड स्थित बाबा मठिया घाट, कोइरीया टोला स्थित त्रिलोकी नगर छठ घाट को दुल्हन की तरह सजाया गया था. घाटों पर रंग-बिरंगे लाइटों से सजाया गया था. जिससे घाट की छटा देखते ही बन रही थी. आज दो दिनों के निर्जला उपवास के बाद छठ व्रती महिलाओं के द्वारा उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ महापर्व का समापन होगा और व्रतियां प्रसाद ग्रहण करने के बाद अन्न ग्रहण करेंगी. वहीं छठ पूजा को लेकर पारंपरिक छठ गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है.
व्रतियों की बढ़ी संख्या : इन सब के बीच चैती छठ में भी व्रतियों की संख्या में काफी इजाफा देखा गया है. लोक आस्था के महापर्व छठ के संबंध में यह मान्यता है कि यह बहुत ही पवित्र पर्व होता है. सच्ची आस्था के साथ जो भी भक्त उपवास रख छठी मइयां की पूजा अर्चना करते है. उनकी मनोकामना पूरी होती है. आचार्य मंजय कुमार मिश्र ने बताया कि छठी मइया की महिमा महान है. छठ व्रत रखने से मन की इच्छा पूरी होती है और परिवार में सुख शांति का वास होता है. पवित्रता के इस पर्व में लोगों की आस्था बढ़ने का एक यह भी कारण है कि इस व्रत के रखने से मनोकामना पूरी होती है.
घाटों पर दिखी सुरक्षा व्यवस्था : इधर, छठ पूजा को लेकर घाटों पर उमड़ने वाली लोगों की भीड़ को देखते हुए शहर के सभी प्रमुख छठ घाटों पर पुलिस की तैनाती की गयी थी. डीएसपी राकेश कुमार ने बताया कि अनुमंडल के सभी थानाध्यक्षो को निर्देश दिया गया है कि वे अपने स्तर से सभी छठ घाट जहां पर व्रतियों की संख्या अधिक है. वहां पर सशस्त्र बल के साथ पुलिस पदाधिकारी की तैनाती करें. रक्सौल, हरैया, नकरदेई, आदापुर, हरपुर, दरपा, महुआवा, रामगढ़वा, भेलाही, पलनवा, छौड़ादानो के थानाध्यक्षों व पुलिस निरीक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे गश्ती करते हुए घाट व व्रतियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे.
रक्सौल : सीमावर्ती शहर रक्सौल से सटे नेपाल में भी चैती छठ की धूम देखी गयी. नेपाल के तराई के इलाके वीरगंज, कलैया, रौतहट, पटेरवा सुगौली सहित नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी छठ का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया. इस दौरान वीरगंज के घड़िअरवा पोखरा स्थित छठ घाट पर सैकड़ो की संख्या में एकत्रित होकर छठ व्रतियों ने भगवान भास्कर की पूजा अर्चना की और उनसे अपने परिवार के सुख शांति की कामना की. छठ को लेकर वीरगंज व नेपाल के अन्य शहरो में उत्सव का माहौल देखने को मिला.
मोतिहारी : आस्था एवं विश्वास का महापर्व चैती छठ व्रत पूरे श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया. दोपहर बाद विभिन्न परिधानों में लिपटे और गांजे बाजे के साथ व्रती घाट पर जाते हुए देखे गये. भक्ति भाव में सराबोर व्रती शाम तक हाथ में अर्घ्य लिये भगवान भाष्कर की ओर देख रहे थे. घाटों पर छठ पूजा के मंगल गीत गूंज रहे थे. व्रती कल उदीयमान सूर्य को अर्घ्य प्रदान कर पारण करेंगे. इस महाव्रत के महात्म को देखते हुए धरे-धीरे चैती छठ व्रतियों की संख्या में वृद्धि हो रही है. व्रत को ले रविवार को भी खरीदारों की भीड़ रही. बताया जाता है कि यह व्रत काफी कठिन होता है. चार दिवसीय इस व्रत को व्रती निरजला रखते है. इसमें उमस भरी गर्मी, प्यास का अधिक लगना इत्यादी शामिल है. लेकिन भगवान भाष्कर के आस्था के सामने सब कुछ फीका पड़ जाता है. शहर के मनरेगा घाट छतौनी धर्मसमाज तालाब, रोइंग क्लब, वृक्षास्थान, एस एन एस कॉलेज, एमएस कॉलेज स्थित घाट, बेलीसराय, गायत्री नगर, श्री कृष्ण नगर, अगरवा, रघुनाथपुर, बडाबरियारपुर सहित कई घाटों रौशनियों से सजाया गया. कही-कही तो लोग अपने दरवाजे पर ही तालाब बनवाकर इस व्रत को कर रहे हैं.
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