दिन में ही ठहर जाती है गांव के लोगों की जिंदगी

Updated at : 08 Sep 2016 7:15 AM (IST)
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दिन में ही ठहर जाती है गांव के लोगों की जिंदगी

बदहाली. सरकारी उपेक्षा का शिकार संुदरपुर गांव बंजरिया प्रखंड का सुंदरपुर गांव आज भी सरकारी उपेक्षा का शिकार है. बूढ़ी गंडक नदी के किनारे बसे इस गांव में अभी तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है़ एक तरफ नदी के कटाव की समस्या है तो दूसरी तरफ आवागमन के लिए सड़क नहीं है. ग्रामीणों […]

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बदहाली. सरकारी उपेक्षा का शिकार संुदरपुर गांव

बंजरिया प्रखंड का सुंदरपुर गांव आज भी सरकारी उपेक्षा का शिकार है. बूढ़ी गंडक नदी के किनारे बसे इस गांव में अभी तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है़ एक तरफ नदी के कटाव की समस्या है तो दूसरी तरफ आवागमन के लिए सड़क नहीं है. ग्रामीणों के सहयोग से चचरी का पुल तो बनता है लेकिन बरसात आने के साथ ही उखड़ जाता है. नाव से या फिर पैदल नदी पार करते हैं लोग.
मोतिहारी : भले ही सरकार गांवों को विकास की पटरी पर लाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है और मास्टर प्लान बनाकर उसे लागू करने का दावा भी करती है़ मगर, बंजरिया के सुंदरपुर गांव तमाम दावों की पोल खोलता नजर आता है़ जिला मुख्यालय से मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर गंडक नदी के किनारे स्थित इस गांव में विकास की किरण आज तक नहीं पहुंच पायी है. न तो इस गांव से निकलने के लिए सड़क बन पायी है और न ही नदी पर पुल बन पाया है.
प्रत्येक वर्ष ग्रामीणों के सहयोग से बांस का चचरी पुल बनता है लेकिन बरसात का महीना आते ही उसे उखाड़ लिया जाता है. सालों भर लोग कभी नदी के कटाव से तो कभी मौसम की मार से जूझते रहते हैं. पुल उखड़ने पर लोग या तो नाव से नदी पार करते हैं या फिर पांच किलोमीटर जटवा घाट से होकर जिला मुख्यालय आते हैं. इमरजेंसी की हालत में लोग नदी पैदल ही पार करते हैं.
नदी के कटाव से हमेशा सहमे रहते हैं लोग: ग्रामीण डाॅ. आजम अंसारी, रवि कुमार, आनंद प्रकाश, ज्याउर्रहमान आदि ने बताया कि नदी का कटाव प्रतिवर्ष होता है. अब तक सैकड़ों लोगों का घर नदी के आगोश में समां चुका है. अभी भी नदी की मुख्य धारा इसी गांव पर टकराती है़ लोगों को हमेशा अपना घर नदी में बह जाने का भय सताते रहता है़ लोग दहशत में जीते हैं.
मसजिद भी आ सकती है नदी के आगोश में: नदी के कटाव के कारण यहां की मसजिद नदी के किनारे आ गयी है और कभी भी गिर सकती है. ग्रामीणों ने बताया कि बालू व अन्य सामग्री कटाव को रोकने के लिए नदी के किनारे पर रखा गया है, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं हुआ. मसजिद अगर नदी में चला जाता है तो लोगों के लिए इबादत करने व नमाज पढ़ने के लिए कोई जगह नही बचेगी.
नहीं है एक भी पक्की सड़क : गांव की आबादी करीब चार हजार है. बावजूद इसके गांव में एक भी पक्की सड़क नहीं है. बरसात का महीना आते ही यहां की सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं़ इससे लोगों को चलना मुश्किल हो जाता है. पंचरूखा पूर्वी पंचायत में यह गांव आता है. सीधा रास्ता नहीं होने के कारण लोग बड़ी मुश्किल से खैरी आते हैं और उसके बाद जटवा घाट पार कर मोतिहारी जाते हैं.
लोग कर सकते हैं आंदोलन
गांव की इस दशा के खिलाफ लोगों में गुस्सा है़ आंदोलन की तैयारी की जाने लगी
गांव में न तो एक सड़क बनी, न ही नदी पर पुल
04 हजार आबादी है पंचरूखा पूर्वी पंचायत के इस गांव की
नदी पर ठोकर बनाने की चल रही प्रक्रिया
सड़क व पुल के लिए प्रस्ताव दिया जा चुका है. नदी पर कटाव रोकने के लिए ठोकर बनाने की भी प्रकिया पूरी कर ली गयी है.
डा. शमीम अहमद, विधायक, नरकटिया
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