हर चेहरे पर दिखा गम, गुस्सा व आंसू

Updated at : 28 Aug 2016 1:31 AM (IST)
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हर चेहरे पर दिखा गम, गुस्सा व आंसू

पकड़ीदयाल के सिरहा कटास गांव में चीख-चीत्कार में गुम हो गयी एंबुलेंस के सायरन की आवाज भिखारी सहनी के घर जुटीं महिलाएं, श्मशान घाट पर बैठे विधायक राणा रणधीर, पूर्व विधायक, अभियान एसपी, एसडीओ व डीएसपी तथा सांसद रमा देवी की गोद में रोती महिला़ लोगों ने कहा, दुश्मनी भिखारी से थी, मासूम ने क्या […]

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पकड़ीदयाल के सिरहा कटास गांव में चीख-चीत्कार में गुम हो गयी एंबुलेंस के सायरन की आवाज

भिखारी सहनी के घर जुटीं महिलाएं, श्मशान घाट पर बैठे विधायक राणा रणधीर, पूर्व विधायक, अभियान एसपी, एसडीओ व डीएसपी तथा सांसद रमा देवी की गोद में रोती महिला़
लोगों ने कहा, दुश्मनी भिखारी से थी, मासूम ने क्या बिगाड़ा था
किसे कौन ढांढ़स बंधाये
रो रहे थे सभी ग्रामीण
मोतिहारी : पकड़ीदयाल के सिरहा कटास गांव का माहौल काफी दर्दनाक था. हरके घर के दरवाजे पर बैठे लोग आंसू बहा रहे थे.जब सायरन बजता एम्बुलेंस भिखारी सहनी के दरवाजे पर रुकी तो एक साथ तीन शव को देख लोगों का कलेजा फट गया. चीख-पुकार के बीच एम्बुलेंस के सारयन की आवाज गुम हो गयी. दरवाजे पर इकठ्ठी हजारों भीड़ के चेहरे पर गम, गुस्सा व आंसू था. ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं था, जिसकी आंखे गुस्से से लाल नहीं थी. भिखारी की पहली पत्नी लालपति देवी बदहवास थी, तो बेटी धनवंती देवी सिर पटक रोये जा रही थी.
परिवार के हरेक सदस्यों का रोते-रोते बुरा हाल था. अपराधियों ने लालपति से पति, पोता व बहन छीन लिया, तो नरेश की पत्नी पुनम को इकलौते पुत्र मंटू के साथ ससुर व सास की हत्या का सबसे ज्यादा मलाल था. वह पागलों की तरह दिवार पर सिर पटक रही थी. उनको ढांढस बंधाने की हिम्मत किसी में नहीं थी. गांव की महिलाएं उनसे नजर छुपा रही थी. कारण था, दरवाजे पर रखी ग्याहर वर्षीय मंटू के साथ उसके दादा व दादी का शव देख उनकी आंखू खूद रो रही थी. गांव के हरेक जुबान पर यही था,माना दुश्मनी भिखारी से थी, मासूम मंटू ने उनका क्या बिगाड़ा था. उसने तो ठीक दुनिया भी नहीं देखी थी.
निकली तीन अर्थियां तो चीख पड़ा सारा गांव: दरवाजे पर बने पंडाल में तीन शव को रख अंतिम रश्मे पुरी की गयी, लेकिन जब एक साथ तीन अर्थी उठी तो लोगों के रोंगटे खड़े हो गये. गांव वालों से लेकर पीडि़त परिवार की चिंख चित्कार से कटास टोला थर्रा गया. अर्थी को कंधे पर लिये भिखारी सहनी का पुत्र रमेश, गणेश, नरेश व पोता दीपक रोते हुए आगे बढ रहा था. शव यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल थे, उनके आंखों से भी आंसू टपक रहे थे. गांव वालों ने ऐसा दर्दनाक दृष्य पहले कभी नहीं देखा था. नहीं पटखों की तरह गोलियों की तड़तड़ाहट ही सुनी थी.
पंचायत भवन परिसर में सिमट गया था गांव : भिखारी सहनी,उसकी दुसरी पत्नी चंपा देवी व पोता मंटु के शव का अंतिम संस्कार सिरसा नदी किनारे हुई.वहीं पर वार्ड सदस्य राजकिशोर का भी अंतिम संस्कार हुआ.इस दौरान सिरसा पंचायत भवन परिसर में सारा गांव सिमट गया था. पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी पेड़ के नीचे बैठे थे. चारों तरफ से गांव वालें उन्हें घेर सवाल दाग रहे थे. पूछ रहे थे कि परिवार के बाकी लोगों के जिंदगी की गारंटी कौन लेगा. उनकी सुरक्षा के लिए प्रशासन क्या सोच रही है. वहां वर्तमान विधायक राणा रणधीर व निर्वतमान विधायक शिवजी राय थी थे. उनको भी ग्रामीणों के सवालों से जुझना पड़ा.
एक घर से एक साथ निकली भिखारी सहनी, पत्नी व पोते की शवयात्रा ़
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